Mahadev Prashad Premi
Feb 2, 2024
Poems
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कोरोना के दौर में जब कवियों की भीड़ ग़ज़लों को ‘वायरल’ करने में लगी है, कवि व्यंग्य में यही कामना करता है कि खुद कोरोना किसी पुराने रोग की तरह बीमार हो जाए। यह कविता महामारी पर मानवीय पीड़ा और हास्य का मिश्रित भाव प्रस्तुत करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 3, 2020
Lifestyle
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ऑनलाइन शॉपिंग आज सिर्फ़ ख़रीदारी नहीं रही, यह धैर्य, विवेक और पासवर्ड-स्मरण शक्ति की परीक्षा बन चुकी है।
जहाँ एक तरफ़ “डिस्काउंट” मुस्कुराता है, वहीं दूसरी ओर शिपिंग चार्ज, रिस्टॉकिंग फीस और रिफर्बिश्ड सच आँख मारता है।
सही खरीदार वही है जो “BUY NOW” दबाने से पहले दिमाग़ का Wi-Fi ऑन रखे।