मेरे घर की ये  दीवारें-कविता रचना

Vidya Dubey Aug 12, 2025 Poems 3

मेरे घर की दीवारें सिर्फ दीवारें नहीं, वे मेरी जिंदगी की साक्षी हैं। उन्होंने मुझे नाचते-गाते, रोते, सपने बुनते, सपनों के टूटने पर टूटते, झगड़ते, मिलते-जुलते देखा है। वे मन का मरोड़, दिल का शोर और भीतर उगते अनचाहे खरपतवार तक देख चुकी हैं।

ये बारिश की बूंदे-हिंदी कविता

Vidya Dubey Jul 15, 2025 हिंदी कविता 2

बारिश की हर बूंद, प्रतीक्षा की तपिश से दहकती है। पेड़-पत्ते जवां हैं, बगिया महकी है, लेकिन प्रेमी नहीं आया। बूंदें अब फूल नहीं, अंगारे बन गई हैं। विद्या पोखरियाल की स्वरचित कविता प्रेम, विरह और मानसून की इस जटिल रागिनी को भावभीने ढंग से उजागर करती है।