Dr Shailesh Shukla
May 25, 2026
Agriculture/environment
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भीषण गर्मी, सूखते जलस्रोत, प्रदूषित हवा और अनियोजित विकास आज मानव सभ्यता के सामने अस्तित्व का संकट बनकर खड़े हैं। यह लेख पर्यावरण संतुलन के बिगड़ते हालात और धरती को बचाने की अनिवार्यता पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 9, 2026
शोध लेख/विमर्श
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आज का विश्व गहरे संकटों और विभाजनों से गुजर रहा है। ऐसे समय में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना, लोकतांत्रिक अनुभव, संतुलित विदेश नीति और युवा शक्ति के कारण विश्व को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह लेख विश्व निर्माण में भारत की संभावित और आवश्यक भूमिका का विश्लेषण करता है।
Dr Shailesh Shukla
May 8, 2026
Agriculture/environment
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पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है? जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सतत विकास, जल संरक्षण, जंगल, ऊर्जा और भारत के भविष्य पर आधारित विस्तृत हिंदी लेख पढ़ें।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 22, 2026
Culture
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धरती संकेत दे रही है, पर मनुष्य उन्हें अनसुना कर रहा है। विश्व पृथ्वी दिवस क्या केवल उत्सव बनकर रह गया है या यह आत्मपरीक्षण का अवसर है—यह लेख इसी प्रश्न को गहराई से टटोलता है।
Dr Shailesh Shukla
Jul 24, 2025
समसामयिकी
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भारत में जल संकट गहराता जा रहा है। 18% जनसंख्या के बावजूद भारत के पास मात्र 4% जल संसाधन हैं। जलवायु परिवर्तन, अति-दोहन और नीतिगत असफलताओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहर "डे ज़ीरो" झेल चुके हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता चिंताजनक स्तर तक घट चुकी है। अब यह केवल पर्यावरण नहीं, एक सामाजिक-राजनीतिक संकट बन चुका है।