क्या हम सचमुच स्वतंत्र हैं — या केवल प्रोग्राम्ड जीवन जी रहे हैं?

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 27, 2026 Self Help and Improvements 0

हम अपने निर्णयों को स्वतंत्र मानते हैं, पर क्या वे सच में हमारे हैं? जब तक हम अपनी आदतों, भय और उधार की इच्छाओं को पहचान नहीं लेते, तब तक हम प्रतिक्रिया-प्रधान जीवन जीते हैं। जागरूकता ही वास्तविक स्वतंत्रता का प्रारंभ है।

देव सो रहे हैं और आम आदमी पिट रहा है….? व्यंग्य

Sunil Jain Rahee Jul 8, 2025 व्यंग रचनाएं 5

जब देव सोते हैं तो देश की नींव भी ऊंघने लगती है। जनता, बाबू, साहब और चपरासी सब अपनी-अपनी तरह से नींद का महिमामंडन करते हैं। जागने की ज़िम्मेदारी बस सेना और कुछ अदृश्य प्रहरी निभाते हैं। इस नींद में सत्ता फलती है, और जनहित सो जाता है।