जाति की पूँछ: लोकतंत्र का सबसे विश्वसनीय अंग डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 19, 2026 व्यंग रचनाएं 0 लोकतंत्र की डाल पर हम खड़े नहीं हैं, अपनी-अपनी पूँछ से लटके हुए हैं।