डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 10, 2026
समसामयिकी
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“युद्ध अब अचानक नहीं फूटता—वह पहले बाज़ार में उतरता है, फिर जीवन में।”
“जब शांति लाभकारी नहीं रह जाती, तब युद्ध नैतिक घोषित कर दिया जाता है।”
“हर युद्ध के बाद कोई विजेता नहीं होता—सिर्फ़ आँकड़े होते हैं।”
“इतिहास मनुष्य से एक ही प्रश्न पूछता है—क्या तुमने पहले से सीखा?”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 6, 2026
आलोचना ,समीक्षा
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सम्यक ज्ञान का अर्थ अधिक जानना नहीं, बल्कि सही ढंग से देख पाना है।
जहाँ शास्त्रार्थ समाप्त होकर अनुभूति शुरू होती है, वहीं से सच्चे विमर्श की यात्रा आरंभ होती है।
यह लेख ज्ञान, कविता, करुणा और चेतना के उसी संतुलन बिंदु की खोज है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 5, 2026
आलोचना ,समीक्षा
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प्रकृति के पास भी भाषा है—संकेतों, ध्वनियों और स्पर्श की।
लेकिन मनुष्य की भाषा उसे केवल बोलने की नहीं, अनुभव को सहेजने, तर्क रचने और सभ्यता बनाने की शक्ति देती है।
यह लेख भाषा को शब्द ब्रह्म, स्मृति, तर्क, न्याय और राज्य की जड़ के रूप में समझने का एक विचारोत्तेजक प्रयास है।