कंजूस मक्खीचूस-हास्य व्यंग्य रचना
कंजूस लोग धन को संग्रह करते हैं, उपभोग नहीं। मगर यह भी कहना होगा कि ये लुटेरों और सूदखोरों से फिर भी भले हैं—क्योंकि कम से कम किसी का लूट नहीं करते, बस खुद को ही नहीं खिलाते। उनका आदर्श वाक्य है — “चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।” ... जहाँ नेता प्रचार से मशहूर होते हैं, वहाँ कंजूस बिना खर्च के ही चर्चा में रहते हैं। मोहल्ले की चाय की थड़ियों पर उनके नाम के किस्से चलते हैं। ... कहते हैं, ये लोग लंबी उम्र जीते हैं — शायद इसलिए कि ज़िंदगी भी बहुत संभालकर खर्च करते हैं।