“नक्षत्र और राशि: आकाश को देखने की दो खिड़कियाँ”

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 23, 2026 India Story \बात अपने देश की 1

नक्षत्र और राशि एक ही चीज़ नहीं—वे आकाश को देखने की दो अलग खिड़कियाँ हैं। नक्षत्र चंद्र की गति से बने हैं, राशि सूर्य के चक्र से। पंचांग पहले गति को समझता है, फिर इकाई बनाता है—यही उसका विज्ञान है। जब हम समझते हैं कि समय के दो मान साथ चल रहे हैं, तब त्योहारों की बदलती तारीख़ें समझ में आने लगती हैं।

पोथी नहीं, सूत्र: पंचांग का जीवित विज्ञान

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

पंडित पोथी नहीं खोलता, वह सूत्र खोलता है—और गणना करता है। पंचांग कोई स्थिर किताब नहीं, हर साल दोहराई जाने वाली एक जीवित गणितीय प्रक्रिया है। ग्रहण भविष्यवाणी नहीं, सूर्य और चंद्र की गति का सटीक परिणाम है। पंचांग इसलिए जीवित है क्योंकि उसने बदलाव को परंपरा का विरोध नहीं, उसका विस्तार माना।

पंचांग: परंपरा नहीं, चलता हुआ गणित

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 18, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

पंचांग कोई पोथी नहीं, हर साल दोहराई जाने वाली एक जीवित गणना है। पंडित भविष्यवाणी नहीं करता, वह खगोलीय मॉडल के आधार पर गणना करता है। सूर्य सिद्धांत आस्था नहीं, सूत्रों और गणित की भाषा में लिखा एक खगोल ग्रंथ है। पंचांग इसलिए जीवित है क्योंकि उसमें बदलाव को परंपरा का विरोध नहीं, उसका हिस्सा माना गया।

तिथि का विज्ञान-पंचांग का रहस्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 18, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

अष्टमी कोई आस्था नहीं, एक सटीक खगोलीय मापन है—12 डिग्री का अंतर। तिथि समय नहीं, कोण है—घंटों में नहीं, डिग्री में मापी जाती है। पंचांग घड़ी से नहीं, आकाश से समय पढ़ता है—यही उसका विज्ञान और सौंदर्य है। जब हम तिथि को “डेट” समझते हैं, तब भ्रम पैदा होता है; जब उसे खगोलीय भाषा समझते हैं, सब स्पष्ट हो जाता है।

शक संवत और विक्रम संवत : दो घड़ियाँ, एक सभ्यता की

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 18, 2026 India Story \बात अपने देश की 1

विक्रम संवत और शक संवत का अंतर केवल दो कैलेंडरों का अंतर नहीं, बल्कि परंपरा और प्रशासन की दो अलग जरूरतों को समझने का विषय है। हमारे त्योहार जहाँ तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त से संचालित होते हैं, वहीं राष्ट्रीय जीवन को एक स्थिर और सरल नागरिक कैलेंडर की आवश्यकता होती है। भारत की समय-परंपरा इतनी समृद्ध है कि यहाँ एक ही देश में धर्म के लिए अलग समय-भाषा और शासन के लिए अलग समय-व्यवस्था साथ-साथ चलती है। शक संवत को अपनाना विक्रम संवत का विरोध नहीं था, बल्कि आधुनिक प्रशासनिक सुविधा और वैज्ञानिक एकरूपता की आवश्यकता का परिणाम था।