तपती धरती, तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा : बिगड़ता पर्यावरण संतुलन औरअस्तित्व का संकट

Dr Shailesh Shukla May 25, 2026 Agriculture/environment 1

भीषण गर्मी, सूखते जलस्रोत, प्रदूषित हवा और अनियोजित विकास आज मानव सभ्यता के सामने अस्तित्व का संकट बनकर खड़े हैं। यह लेख पर्यावरण संतुलन के बिगड़ते हालात और धरती को बचाने की अनिवार्यता पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है।

स्वैच्छिक जनसंख्या नियंत्रण: 21वीं सदी का अनिवार्य वैश्विक विमर्श

Dr Shailesh Shukla Apr 23, 2026 Agriculture/environment 1

21वीं सदी में जहाँ तकनीकी प्रगति नई ऊँचाइयों को छू रही है, वहीं अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि विकास के मॉडल को अस्थिर कर रही है। यह लेख उत्तरदायी अभिभावकत्व और स्वैच्छिक जनसंख्या नियंत्रण के माध्यम से संतुलित और टिकाऊ भविष्य की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

इलाज की भरमार, बीमारी ज़िंदा है

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 11, 2026 Health And Hospitals 0

“यह समस्या केवल चिकित्सा जगत तक सीमित नहीं है। यह समाज, मनुष्य, राजनीति, पर्यावरण और नैतिकता—सबमें एक साथ फैली हुई बीमारी है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हर जगह इलाज चल रहा है, पर बीमारी ठीक नहीं हो रही—क्योंकि इलाज ही ग़लत है।” आज की दुनिया में सबसे बड़ा संकट बीमारी का नहीं, बल्कि बीमारी की पहचान का संकट है। मन की बीमारियों के लिए मोटिवेशनल वीडियो, पर्यावरण के लिए सम्मेलन, राजनीति के लिए भावनात्मक नारे— ये सब प्लेसीबो हैं। जब नक़ली इलाज सामान्य हो जाता है, तब असली मौतें सिर्फ़ आँकड़े बनकर रह जाती हैं।

जल संकट : टिकाऊ प्रबंधन की अनिवार्यता

Dr Shailesh Shukla Jul 24, 2025 समसामयिकी 1

भारत में जल संकट गहराता जा रहा है। 18% जनसंख्या के बावजूद भारत के पास मात्र 4% जल संसाधन हैं। जलवायु परिवर्तन, अति-दोहन और नीतिगत असफलताओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहर "डे ज़ीरो" झेल चुके हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता चिंताजनक स्तर तक घट चुकी है। अब यह केवल पर्यावरण नहीं, एक सामाजिक-राजनीतिक संकट बन चुका है।