तपती धरती, तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा : बिगड़ता पर्यावरण संतुलन औरअस्तित्व का संकट

Dr Shailesh Shukla May 25, 2026 Agriculture/environment 1

भीषण गर्मी, सूखते जलस्रोत, प्रदूषित हवा और अनियोजित विकास आज मानव सभ्यता के सामने अस्तित्व का संकट बनकर खड़े हैं। यह लेख पर्यावरण संतुलन के बिगड़ते हालात और धरती को बचाने की अनिवार्यता पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है।

अरावली: ऊँचाई की परिभाषा, ज़मीन की हकीकत

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 23, 2025 India Story \बात अपने देश की 0

अरावली की अहमियत उसकी ऊँचाई में नहीं, उसके काम में है। सवाल यह नहीं कि पहाड़ी कितनी ऊँची है, सवाल यह है कि वह हमें क्या बचा रही है।अरावली को लेकर बहस दरअसल विकास और संरक्षण के बीच उस संतुलन की तलाश है, जो अक्सर नीति में खो जाता है और प्रकृति में दिखाई देता है।

आप बधाई के पात्र है

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 29, 2020 Fashion,Food and Traveling 1

कोरोना काल केवल एक महामारी नहीं था, वह आत्मविश्लेषण का अवसर भी था। आप पेट्रोल बचाकर, नींद पूरी कर, प्रकृति को साँस लेने का मौका देकर और वर्क फ्रॉम होम को सुव्यवस्थित कर बधाई के पात्र हैं। एक ठहराव ने हमें फिर से जीना सिखाया — सादगी से, सहानुभूति से।