नव संवत्सर गीत

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 19, 2026 हिंदी कविता 0

“छंटे कुहासा, सूरज निकले, मन का हर अंधकार पिघले… नव विचारों के साथ यह संवत्सर केवल तिथि नहीं, बल्कि चेतना का एक नया उदय है।”