आम का मौसम : मधुमेही मनुष्य का मीठा महाभारत

डॉ मुकेश 'असीमित' May 27, 2026 ललित निबंध 0

आम कोई आम फल नहीं जी। खासकर हम जैसे डायबिटीज़ के मारे लोगों के लिए आम वैसा है जैसे सामने महबूबा खड़ी हो—महकती, मुस्कराती, रस टपकाती—और हम ग्लूकोमीटर की अदालत में अपराधी की तरह खड़े हों।

अलाव, अंगीठी और उल्टे पैरों वाली काकी

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 6, 2026 संस्मरण 0

बचपन की सर्दियाँ कोई निजी स्मृति नहीं होतीं—वे सामूहिक अनुभव होती हैं। अंगीठी की आँच, ढिबरी की लौ, उल्टे पैर खोजती आँखें और अलाव के चारों ओर सुलगती किस्सागोई—सब मिलकर वह गर्माहट रचते थे, जिसे आज के रूम हीटर भी नहीं दे पाते।

मुझको मेरा मायका दे दो-कविता रचना

Vidya Dubey Aug 5, 2025 हिंदी कविता 2

यह कविता मायके की गहरी भावनात्मक यादों को समेटे हुए है। इसमें एक बेटी का अपने बचपन के आंगन, गली-चौबारे, पुराने नाम, प्यार-दुलार और पुरानी धुनों को वापस पाने की ललक उभरती है। कवयित्री को सोना-चांदी या हीरे-मोती की चाह नहीं, बस अपने मायके की मिट्टी की गंध, उस छोटे किनारे की गर्माहट और अपनों का सहारा चाहिए। यह कविता नारी की संवेदनशील भावनाओं का चित्रण है, जो विवाह के बाद अपने मायके की अनमोल स्मृतियों को दिल में संजोए रहती है। यह ममता, अपनापन और अतीत की सजीव झलक पेश करती है।