पुस्तक समीक्षा-भारत का आदिवासी राबिनहुड टंट्या मामा

Vivek Ranjan Shreevastav Jan 30, 2026 Book Review 0

यह पुस्तक भारत के उस आदिवासी राबिनहुड की कथा है, जिसने जंगलों से निकलकर अंग्रेजी सत्ता और जमींदारी शोषण को खुली चुनौती दी। टंट्या मामा केवल योद्धा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक मार्गदर्शक और दूरदर्शी जननायक थे, जिनका जीवन जल-जंगल-जमीन के संघर्ष को समर्पित रहा। उपन्यास आदिवासी समुदाय की सामूहिक चेतना, साहस और न्यायप्रियता को सरल, रोचक और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करता है।

वंदे मातरम के 150 वर्ष: एक गीत नहीं, राष्ट्र-धड़कन का उत्सव

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 15, 2025 Culture 0

वंदे मातरम कोई साधारण गीत नहीं है—यह वह ध्वनि है जो कभी कोड़ों की मार के बीच भी गूंजती थी और आज बहसों के शोर में दबाई जा रही है। इसके 150 वर्ष हमें यह याद दिलाते हैं कि राष्ट्र केवल सीमाओं से नहीं, स्मृतियों से बनता है।