डिजिटल लत और परिवारों के बिखरते ताने-बाने
भारत में डिजिटल क्रांति ने जहां अवसर दिए, वहीं एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी—डिजिटल लत। यह लेख बताता है कि कैसे स्क्रीन के बढ़ते समय ने बच्चों, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।
भारत में डिजिटल क्रांति ने जहां अवसर दिए, वहीं एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी—डिजिटल लत। यह लेख बताता है कि कैसे स्क्रीन के बढ़ते समय ने बच्चों, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।
“यह समस्या केवल चिकित्सा जगत तक सीमित नहीं है। यह समाज, मनुष्य, राजनीति, पर्यावरण और नैतिकता—सबमें एक साथ फैली हुई बीमारी है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हर जगह इलाज चल रहा है, पर बीमारी ठीक नहीं हो रही—क्योंकि इलाज ही ग़लत है।” आज की दुनिया में सबसे बड़ा संकट बीमारी का नहीं, बल्कि बीमारी की पहचान का संकट है। मन की बीमारियों के लिए मोटिवेशनल वीडियो, पर्यावरण के लिए सम्मेलन, राजनीति के लिए भावनात्मक नारे— ये सब प्लेसीबो हैं। जब नक़ली इलाज सामान्य हो जाता है, तब असली मौतें सिर्फ़ आँकड़े बनकर रह जाती हैं।