पहचान का आईना: आप जो सोचते और साधते हैं, वही आप हैं

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 22, 2026 Self Help and Improvements 1

मनुष्य की असली पहचान उसके दावों से नहीं, बल्कि उसके मन में बसे विचारों, उसके चुने हुए लक्ष्यों और उसके समर्पण से बनती है। हम वही हैं, जिसे पाने के लिए हम समय और ऊर्जा अर्पित करते हैं।

उठ ,चल ,फिर दौड़-Poems-Hindi

Vidya Dubey Jul 10, 2025 हिंदी कविता 2

यह कविता जीवन के संघर्ष, आत्मविश्वास और लक्ष्य साधना की प्रेरणा देती है। गिरने, थमने और लड़खड़ाने के बीच भी उठकर आगे बढ़ते रहने की बात करती है। यह पसीने को मेहनत का मोती मानती है और हार को मंजिल की सीढ़ी।