Vidya Dubey
Sep 16, 2025
हिंदी कविता
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माँ की यादों में भीगती पलकों से उठती सिसकियाँ अब कभी थमती नहीं। अनकही बातों की भीड़ में हर करवट बेचैनी बनकर जागती है। आँचल की नमी, गोदी का सुकून और अधूरी बातें—सब समय के पहिए में छूट गए। अब बस माँ का इंतज़ार ही शेष है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 8, 2025
Book Review
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"तुम मेरे अज़ीज़ हो" सिर्फ प्रेम का नहीं, आत्म-संवाद, स्मृति और मौन की यात्रा है। पंकज त्रिवेदी की सरल भाषा में छिपे गहन भाव, प्रेम को एक दार्शनिक और अनुभूतिपरक अनुभव में बदल देते हैं। यह संग्रह पढ़ने नहीं, भीतर महसूस करने के लिए है।