डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 27, 2026
Culture
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क्या राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र हैं या हमारे भीतर की एक चेतना? यह लेख राम को देह से तत्व तक समझने की एक गहन यात्रा है, जो बताता है कि राम किसी धर्म तक सीमित नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च संवेदनशील अवस्था हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 24, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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गीता हमें सिखाती है कि जीवन का सबसे बड़ा संकट युद्ध नहीं, निर्णयहीनता है। कर्तव्य करते हुए फलासक्ति त्यागना, समत्व में स्थिर रहना और भीतर के सत्य की शरण लेना ही गीता का सार है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 22, 2025
Culture
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ईश्वर को जानने की हड़बड़ी में हम स्वयं को जानने की ज़रूरत भूल जाते हैं।
वेदांत विश्वास नहीं, अनुभव की बात करता है—मानने की नहीं, घटित होने की।
जो अनुभूति का विषय है, उसे सिद्धांत में बाँध देना शायद सबसे बड़ी भूल है।
शायद परमसत्ता ऊपर कहीं नहीं, उसी चेतना में है जिससे हम प्रश्न पूछ रहे हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 11, 2025
Darshan Shastra Philosophy
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“मनुष्य की सबसे लंबी यात्रा कोई भौगोलिक नहीं होती — वह भीतर जाती है।
आत्मबोध से विश्वबोध तक की यह यात्रा ‘मैं’ से ‘हम’ बनने की प्रक्रिया है — जहाँ व्यक्ति स्वयं को जानकर समस्त सृष्टि से एकात्म हो जाता है।
जब ‘स्व’ का दीप जलता है, तब ‘सर्व’ का सूरज उगता है — यही चेतना की परिपूर्णता है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 28, 2025
Darshan Shastra Philosophy
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ऋग्वेद का नासदीय सूक्त ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर विश्व के सबसे प्राचीन दार्शनिक चिंतन में से एक है। यह कहता है कि जब न अस्तित्व था न अनस्तित्व, तभी कुछ अप्रकट ऊर्जा ने सृष्टि का आरंभ किया। “काम” या इच्छा पहली हलचल थी जिसने ब्रह्मांड को गति दी। यह सूक्त हमें सिखाता है कि प्रश्न ही ज्ञान का प्रथम चरण हैं—और रहस्य ही सृष्टि की सबसे बड़ी सुंदरता।