डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 9, 2026
Self Help and Improvements
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मनुष्य अक्सर अपनी कमजोरियों को पहचानने के बजाय उन्हें बचाने में अधिक ऊर्जा लगा देता है। सुविधा और स्वीकृति के लिए किया गया हर समझौता धीरे-धीरे आत्म-सम्मान को कमजोर करता है। वास्तविक शक्ति तब जन्म लेती है जब हम अपनी कमजोरियों को स्पष्ट रूप से स्वीकार करके सत्य का मार्ग चुनते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 8, 2026
Self Help and Improvements
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आज के समय में सफल दिखना अक्सर वास्तविक विकास से अधिक महत्व पा गया है। पर सच्चा परिवर्तन बाहरी चमक से नहीं, भीतर की समझ, चरित्र और जागरूकता से जन्म लेता है। जीवन का सबसे मूल्यवान निवेश वही है जो हम स्वयं के विकास में करते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 1, 2026
Self Help and Improvements
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झुकना हमेशा कमजोरी नहीं होता, पर भीतर से झुक जाना आत्म-द्रोह है। सच्चा सामंजस्य बाहरी संतुलन और भीतरी स्पष्टता के साथ जीना है—एडजस्ट करना, पर आत्म-सम्मान को गिरवी न रखना।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 27, 2026
Self Help and Improvements
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हम अपने निर्णयों को स्वतंत्र मानते हैं, पर क्या वे सच में हमारे हैं? जब तक हम अपनी आदतों, भय और उधार की इच्छाओं को पहचान नहीं लेते, तब तक हम प्रतिक्रिया-प्रधान जीवन जीते हैं। जागरूकता ही वास्तविक स्वतंत्रता का प्रारंभ है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 26, 2026
Self Help and Improvements
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सत्य सिद्धांतों में नहीं, हमारे दैनिक व्यवहार और निर्णयों में प्रकट होता है। जब हम अपने जीवन को साक्षी भाव से देखना शुरू करते हैं, तब अनुभव ही हमारा शिक्षक बन जाता है और सत्य स्वयं स्पष्ट होने लगता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 25, 2026
Self Help and Improvements
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आत्म-प्रेम हर इच्छा पूरी करने का नाम नहीं, बल्कि अपने प्रति कठोर सत्यनिष्ठ होने का साहस है। जागरूकता ही वह शक्ति है जो हमें आत्म-भोग से ऊपर उठाकर वास्तविक विकास की ओर ले जाती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 25, 2026
व्यंग रचनाएं
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“हम इसे चोरी मानते ही नहीं। हम सीना ठोककर कहते हैं—यह हमारा मौलिक अधिकार है। हमने तो छह दिखाया था, आपने नौ समझ लिया तो यह आपकी दृष्टि-दोष है।”
“हम विचारों की खेती कम और प्रतिलिपियों की फसल अधिक उगाते हैं।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 24, 2026
Self Help and Improvements
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मनुष्य की पहचान उसके दावों से नहीं, उसके दैनिक चयन और प्रतिबद्धता से बनती है। हम जो निरंतर सोचते और साधते हैं, वही हमारे चरित्र और नियति को आकार देता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 23, 2026
Self Help and Improvements
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प्रदर्शनप्रिय मन बाहरी स्वीकृति को ही जीवन का आधार बना लेता है। दिखावे की यह प्रवृत्ति भीतर की असुरक्षा को ढकने का प्रयास है। सच्ची स्वतंत्रता तब जन्म लेती है, जब हम तालियों से ऊपर उठकर अपने अंतरात्मा की स्वीकृति को महत्व देते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 22, 2026
Self Help and Improvements
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मनुष्य की असली पहचान उसके दावों से नहीं, बल्कि उसके मन में बसे विचारों, उसके चुने हुए लक्ष्यों और उसके समर्पण से बनती है। हम वही हैं, जिसे पाने के लिए हम समय और ऊर्जा अर्पित करते हैं।