गीतामृत भाग 1: कर्म का धनुष उठा रे पार्थ | गीता सार की सरल संगीतमय प्रस्तुति
गीतामृत भाग 1 में अर्जुन के विषाद से कर्मयोग, आत्मज्ञान और समत्व तक श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को सरल हिंदी काव्य, संगीत और narration में अनुभव करें।
गीतामृत भाग 1 में अर्जुन के विषाद से कर्मयोग, आत्मज्ञान और समत्व तक श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को सरल हिंदी काव्य, संगीत और narration में अनुभव करें।
श्रीकृष्ण अर्जुन को कलियुग की विभीषिका 'रिश्वत' के स्वरूप से अवगत करा रहे हैं। पार्श्व में छिपा राक्षसी रूप और धनराशि की पोटलियाँ इस भ्रष्टाचार के मायावी विस्तार का प्रतीक हैं। यह संवाद धर्म, विवेक और युगबोध का अद्भुत मिश्रण है।