“हम आपका लेख छापेंगे… किसी दिन!”

Wasim Alam Dec 7, 2025 Blogs 0

लेखक लेख भेज देता है, पर जवाब का इंतज़ार ही उसका असली रोमांच बन जाता है। ‘यथासमय’ जैसे रहस्यमय शब्दों, संपादकों की कवि-सुलभ भाषा और अनंत प्रतीक्षा के बीच लेखक खुद ही व्यंग्य का विषय बन जाता है—पेपर पर नहीं, अपने मन की डायरी में।