नव संवत्सर गीत
“छंटे कुहासा, सूरज निकले, मन का हर अंधकार पिघले… नव विचारों के साथ यह संवत्सर केवल तिथि नहीं, बल्कि चेतना का एक नया उदय है।”
“छंटे कुहासा, सूरज निकले, मन का हर अंधकार पिघले… नव विचारों के साथ यह संवत्सर केवल तिथि नहीं, बल्कि चेतना का एक नया उदय है।”
“हमसे हर ओर उजाले हैं, क्योंकि हम दिलवाले हैं!” “चेहरे पर कोई चेहरा नहीं, जो हैं, हम हूबहू हैं वही!” “प्रेम हमारा जीवन सार, प्रकृति से करते हैं प्यार!” “अनुपम यह आत्म-उपहार, तुकबंदी भरे ये प्रिय उद्गार!”