मुगालते पाल लो लेकिन सफेद हाथी मत पालो !
“कुत्ते पाल लो, मुगालते पाल लो— लेकिन सफेद हाथी मत पालो, उसके दाँत अच्छे-अच्छों को पसीना ला देते हैं।”
“कुत्ते पाल लो, मुगालते पाल लो— लेकिन सफेद हाथी मत पालो, उसके दाँत अच्छे-अच्छों को पसीना ला देते हैं।”
मोगली सल्तनत का दरबार दो सदियों के बीच झूला झूलता है—एक ओर शाही खंजर, सुराही, घूंघरू; दूसरी ओर जींस, बीयर, पिज़्ज़ा और जिम। बादशाह की नीतियाँ अख़बारों से सीखी गईं, शहज़ादा सलीम ‘हैलो डैड’ कहकर बगावत की सूचना कुरियर से देता है। नर्तकी का ग्लास सिंहासन तक पहुँचता है, तलवारें जंग खाती हैं और घोड़े बेरोज़गार। सत्ता का तख़्त अंततः नृत्य-मंच में बदल जाता है—और जनता तमाशा देख हँसती।