आखिर क्यों राजनीतिक विकल्प की निरंतर तलाश में हैं भारतीय नागरिक

Dr Shailesh Shukla May 29, 2026 समसामयिकी 1

भारतीय लोकतंत्र में मतदाता अब केवल परंपरागत राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहना चाहता। बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, राजनीतिक ध्रुवीकरण और जनसमस्याओं के समाधान की कमी ने नागरिकों को नए राजनीतिक विकल्पों की तलाश के लिए प्रेरित किया है। आम आदमी पार्टी, टीवीके और सोशल मीडिया आधारित अभियानों की लोकप्रियता इसी बदलती जनभावना का संकेत है। यह लेख भारतीय मतदाता की मनोवृत्ति, राजनीतिक विश्वास के संकट और लोकतंत्र में उभरते नए विकल्पों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

राजनीति की गीता: कुर्सीपुराण का अंश

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 5, 2026 व्यंग रचनाएं 0

यह गीता मोक्ष नहीं दिलाती, यह कुर्सी दिलाती है—और वही इसका सबसे बड़ा धर्म है।जहाँ कर्म दूसरों से कराया जाता है और फल स्वयं भोगा जाता है, वहीं से राजनीति का शास्त्र शुरू होता है।

लोकतंत्र का नया स्तंभ : चालीस प्रतिशत

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 15, 2025 व्यंग रचनाएं 0

इस देश में विकास कार्य अब सड़क, स्कूल और दरी से नहीं, सीधे प्रतिशत से तय होते हैं। विधायक विकास नहीं देखते, वे सिर्फ़ यह पूछते हैं—“हमें कितना प्रतिशत मिलेगा?” यह व्यंग्य लेख उसी आत्मविश्वासी भ्रष्टाचार का दस्तावेज़ है, जहाँ लोकतंत्र चार स्तंभों पर नहीं, चालीस प्रतिशत पर टिका है।