मक्खनमहापुराण-चापलूस्योपनिषद् का उत्तर आधुनिक खंड

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 26, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मक्खनमहापुराण” चापलूस्योपनिषद् का उत्तर-आधुनिक संस्करण है, जहाँ प्रशंसा और चाटुकारिता के बीच की महीन रेखा पर तीखा व्यंग्य किया गया है। यह रचना दिखाती है कि कैसे ‘मक्खनयोग’ आज के दफ्तर, साहित्य, राजनीति और सामाजिक जीवन का अनिवार्य शास्त्र बन चुका है—जहाँ योग्यता से ज्यादा ‘लोचदार जीभ’ और सही समय पर किया गया लेपन ही सफलता की असली कुंजी है।

मंचीय कवि सम्मेलन की मच मच

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 26, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज का मंचीय कवि सम्मेलन कविता का नहीं, प्रदर्शन का उत्सव बन गया है—जहाँ कविता घूंघट में सिमटी रहती है और चुटकुले, अभिनय और जुगाड़ का नाच चलता रहता है।

“हम आपका लेख छापेंगे… किसी दिन!”

Wasim Alam Dec 7, 2025 Blogs 0

लेखक लेख भेज देता है, पर जवाब का इंतज़ार ही उसका असली रोमांच बन जाता है। ‘यथासमय’ जैसे रहस्यमय शब्दों, संपादकों की कवि-सुलभ भाषा और अनंत प्रतीक्षा के बीच लेखक खुद ही व्यंग्य का विषय बन जाता है—पेपर पर नहीं, अपने मन की डायरी में।