टंकी का बयान : एक गिरावट की आत्मकथा
यह टंकी सिर्फ़ कंक्रीट का ढाँचा नहीं थी, यह व्यवस्था का आईना थी। उद्घाटन से पहले गिरकर इसने बता दिया कि जब नीयत खोखली हो, तो सबसे मज़बूत ढांचा भी बैठ जाता है।
यह टंकी सिर्फ़ कंक्रीट का ढाँचा नहीं थी, यह व्यवस्था का आईना थी। उद्घाटन से पहले गिरकर इसने बता दिया कि जब नीयत खोखली हो, तो सबसे मज़बूत ढांचा भी बैठ जाता है।
मेरा बाप घर में मर गया, पर बाबूजी की फ़ाइल में अभी ज़िंदा है। बिन पैसे के यहाँ कोई मरता नहीं— यहाँ मौत भी सरकारी प्रक्रिया है।
इस देश में विकास कार्य अब सड़क, स्कूल और दरी से नहीं, सीधे प्रतिशत से तय होते हैं। विधायक विकास नहीं देखते, वे सिर्फ़ यह पूछते हैं—“हमें कितना प्रतिशत मिलेगा?” यह व्यंग्य लेख उसी आत्मविश्वासी भ्रष्टाचार का दस्तावेज़ है, जहाँ लोकतंत्र चार स्तंभों पर नहीं, चालीस प्रतिशत पर टिका है।