हवाओं से जंग और अज़्म की जीत
तेज़ हवाओं और उग्र लहरों के बीच खड़ा मनुष्य जब हार मानने को होता है, तभी उसका अज़्म उसे जीवन की ओर लौटा लाता है। यह कविता द्वेष से मुक्त होकर, वफ़ा के सागर में एक नए जीवन-निज़ाम की कल्पना करती है।
तेज़ हवाओं और उग्र लहरों के बीच खड़ा मनुष्य जब हार मानने को होता है, तभी उसका अज़्म उसे जीवन की ओर लौटा लाता है। यह कविता द्वेष से मुक्त होकर, वफ़ा के सागर में एक नए जीवन-निज़ाम की कल्पना करती है।