उठो पार्थ, अपना मोबाइल उठाओ: सोशल मीडिया युग का नया धर्मयुद्ध

Pradeep Audichya Jul 24, 2026 व्यंग रचनाएं 1

जब जीवन का धर्मयुद्ध मोबाइल स्क्रीन पर लड़ा जाने लगे और रिश्तों की पहचान लाइक-कमेंट से होने लगे, तब आधुनिक पार्थ को जगाने के लिए केशव भी नया डिजिटल ज्ञान देते हैं। पढ़िए सोशल मीडिया की आदतों पर तीखा और मनोरंजक व्यंग्य।

ब्रज की एयरलाइंस: ब्रज भाषा में मजेदार फ्लाइट अनाउंसमेंट

डॉ मुकेश 'असीमित' May 3, 2026 हास्य रचनाएं 0

कल्पना कीजिए, अगर ब्रज क्षेत्र की अपनी एयरलाइन होती और पायलट, एयरहोस्टेस, क्रू सब ब्रज भाषा में घोषणाएँ करते—तो सीट बेल्ट से लेकर लैंडिंग तक हर बात रस, ठिठोली और जय श्रीराधे में भीग जाती।

आराम करो –आराम में ही राम बसा है-हास्य-व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 22, 2025 व्यंग रचनाएं 3

भागम-भाग की ज़िंदगी का असली गणित है—भाग को भाग दो, और उत्तर आएगा ‘आराम’। खाट पर लेटना, कम्बल में दुनिया की फिक्र लपेटना ही असली दर्शन है। काम दुखों की जड़ है, पर आराम में पहले से ही राम बसे हैं। खरगोश दौड़ता है, कछुआ जीतता है, क्योंकि वो आराम से चलता है। तो मेरी मानो—खाट बिछाओ, पैर फैलाओ और कलयुग के मोक्ष ‘आराम’ का आनंद लो।

आजाद गजल -क्या मिला!

Prahalad Shrimali Jul 10, 2025 गजल 2

प्रह्लाद श्रीमाली की यह रचना हास्य और कटाक्ष के माध्यम से सामाजिक व्यवहारों, ढकोसलों और राजनीतिक विडंबनाओं पर करारा व्यंग्य करती है। 'क्या मिला?' के सवाल के साथ यह रचना हमें अपने ही कर्मों, परंपराओं और सोच पर पुनर्विचार करने को मजबूर करती है।