वोट का हाट बाजार-हास्य व्यंग्य रचना

वोट का हाट बाजार

चाय के डिस्पोजल कप को देखते हुए भरोसीलाल ने कहा ये चाय है चुनाव और कप है जनता,चुनाव खत्म जनता कचरे में।फिर चमन लाल से पूछा अगले महीने कहीं चुनाव है क्या ? चमन ने कहा तुझे क्या करना है ? पहले जहां हो रहे है वहां तो निपट जाने दे। भरोसी किसी के भरोसे में न आने वाला था ,बोला ये होते ही रहेंगे ,मुझे चुनाव का समय बहुत मजेदार समय लगता है। ,,इसमें मजा क्या है,? अरे बहुत आनंद आता है भरोसी बोला । चुनाव आता है ,तब कुछ ऐसे शब्द सुनाई देने आने लगते हैं जो रोज नहीं सुनाई देते,,। जैसे बेरोजगारी,महंगाई,,नौकरी ,सड़कें ,बिजली, किसान ऐसी बातें सुनने को मिलती है तो अच्छा लगता है। मजा आता है, सड़कों के स्वास्थ्य शिविर लगने लगते हैं ।बिजली दस बारह घंटे आकर ओवरटाइम करने लगती है। अच्छा लगता है जब सब नेता मिलकर गरीबी की चिन्ता करते हुए गरीब की बोली लगाते हैं। भरोसी लाल ,बोले ही जा रहा है। चुनाव में नेता ही बोलते है जनता सुनती है ,बाद में भी कभी नेता सुनते ही नहीं। चुनाव की सभा इंद्रलोक सी होती है,चारों तरफ आनंद ही आनंद होता है।मतदाता को लगने लगता है कि वह इंद्रलोक का स्वामी है कि बस आंख बंद की और कामधेनु सामने । एक दिन में कई बार उसे लगता है कि बस वह चुनाव निपटते ही दो तीन दिन में ही फोर्ब्स पत्रिका के फ्रंट पेज पर उसका फोटो होगा,बैंक वाले उसके घर के आगे लाइन लगाकर खड़े होगे,सर एक करोड़ की एफ डी हमे भी दे दो। नेताजी के पांडाल में खड़ा युवा अगले महीने से किसी सरकारी दफ्तर में बैठने का अभ्यास करने लगता है । अब चाय की टपरी में बैठे लोग इस बातचीत में दिलचस्पी लेने लगते है, उधर बैठा आदमी बोला भैया अगले महीने से मेरा बेटा नौकरी पर जाने लगेगा क्या ? दो साल से परीक्षा की तैयारी कर रहा है,परीक्षा होने के पहले ही सरकारी सिस्टम खुद ही परीक्षा में फेल हो जाता है। आज एक नेताजी की सभा में गया था वह कह रहे थे नौकरी देंगे , भरोसी लाल बोला नौकरी देने का दूसरे दल वाले भी कह रहे है,मतलब हर पार्टी की अलमारी में नौकरी रखी है,बस उठाओ और दे दो। भरोसी लाल बोला चमन अपने छोटे सरकार को जानता है न,वही जिनके पिताजी विधायक थे। एक लड़के को उन्होंने नौकरी दिलवा दी, थी।वह RTO बैरियर पर खड़े होकर ट्रक रोकता था ,चमन ने पूछा अरे वाह फिर तो RTO की सरकारी नौकरी हुई ? नहीं नहीं,,RTO तो सरकारी था,पर लड़का प्रायवेट वसूली करता था । अब छोटे सरकार के घर पर जाना उनके साथ फोटो खींचना,फिर दिनभर उनकी गाड़ी में बैठना उनकी सेवा करना भी सरकार की सेवा है ,वह भी सरकार की नौकरी क्यों नहीं हुई ? सब ने सिर हिलाया हामी भरी । दूसरे ने कहा मेरा लड़का तो खनिज विभाग में कार्य करता था। अरे वाह क्या काम था उसका ,,? नदियों से रेत निकालकर बेचने का । ये तो प्रायवेट हुआ,सरकारी कैसे हुआ,,। वह बोला अरे वह काम ही एक मंत्री का था ,मंत्री के काम आएगा ,तो हुआ न सरकारी नौकर ,ऐसी नौकरी करोड़ों लोगों उपलब्ध कराई जा सकती है । भरोसी लाल बोला “चुनाव होते रहना चाहिए इस से आदमी की कीमत का पता चलता रहता है उस से ये पता चलता है कि हमारी कीमत क्या है ? एक ने कहा कि दस हजार में ये वोट हमारा हुआ ये पकड़िए एडवांस पूरे पैसे । ,दूसरा आया कहा कि आपका वोट तो बहुत कीमती है, ये क़ीमत कम है ,आप हमसे तीस हजार लेना सरकार बनाओ । दूसरी पार्टी वाला बोला देखो हम आपको एक साड़ी और जीवन आनंद पेय पदार्थ दिए जाते हैं। भरोसी लाल बोला इस से हमको लगता है कि हम मंडी में खड़े है,,कौन कहता है कि इस देश में आदमी की कोई कीमत नहीं है आने दीजिए चुनाव आपको लगेगा कि इस से बढ़िया हाट बाजार ही नहीं है।

Pradeep Audichya

प्रदीप औदिच्य आयु 48 वर्ष शिक्षा bsc.MA LLB. व्यवसाय वकालत…

प्रदीप औदिच्य आयु 48 वर्ष शिक्षा bsc.MA LLB. व्यवसाय वकालत पठन पाठन में स्कूल समय से रुचि व्यवस्थित लेखन वर्ष 2020 से,, व्यंग्य रचना स्वदेश समूह में नियमित कॉलम प्रारंभ लगभग 300 से अधिक व्यंग्य, स्वदेश,अमर उजाला,दैनिक ट्रिब्यून,जागरण सहित विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित,, पीपुल्स समाचार चैनल के लिए भी व्यंग्य लेखन,, पता MIG 4 housing board colony near budhe balaji mandir Guna Madhya Pradesh 473001

Comments ( 0)

Join the conversation and share your thoughts

No comments yet

Be the first to share your thoughts!