माननीय पार्षद जी, चुनाव जीत गए—अब ज़रा वार्ड में भी घूम आइए!
सुबह की सैर स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती है। लेकिन हमारे मोहल्ले में यह सैर अब स्वास्थ्य के साथ-साथ साहस, संतुलन और संकट-प्रबंधन का प्रशिक्षण भी देने लगी है।
मैं और मेरा एक मित्र रोज की तरह पैदल जा रहे थे। रास्ते में पहले कचरे का स्थायी पहाड़ मिला। उसे पार किया तो वहाँ विचरण करते सांडों ने हमारा स्वागत किया। कभी कचरे से बचते, कभी सांड की दिशा देखते और कभी सामने से आती गाड़ी से स्वयं को बचाते हुए हम किसी तरह निकल गए।
मित्र ने कहा—
“आज की वॉक में कैलोरी कम जली होगी, लेकिन जान बचाने की कला जरूर निखर गई!”
हँसी तो आई, लेकिन सवाल भी उठा—आखिर हमारा वार्ड किसकी जिम्मेदारी है?
मोहल्ले का कचरा केवल नगरपालिका की समस्या नहीं
यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि सड़क किनारे कचरा फेंकने वाले लोग भी हमारे ही मोहल्ले के हैं। कचरा आसमान से नहीं गिरता और न ही रात के अँधेरे में किसी दूसरे शहर से ट्रक भरकर आता है।
सुबह जिस कचरे पर हम नाराज होते हैं, संभव है पिछली शाम उसी ढेर में हमारे किसी परिचित ने अपनी थैली डाल दी हो।
इसलिए नागरिकों को समझाना आवश्यक है। घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था हो, निर्धारित स्थान बताया जाए, गीला और सूखा कचरा अलग करने की जानकारी दी जाए और बार-बार सार्वजनिक रास्ते पर कचरा डालने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी हो।
लेकिन यह समझाइश देगा कौन?
क्या हर नागरिक अलग-अलग घर का दरवाजा खटखटाए? क्या सैर करने वाले लोग सांडों को रास्ते से हटाएँ? क्या मोहल्ले के लोग स्वयं सफाईकर्मी, प्रकाश निरीक्षक और सड़क अभियंता बन जाएँ?
यहीं से वार्ड पार्षद की वास्तविक भूमिका शुरू होती है।
पार्षद केवल चुनाव जीतने वाला व्यक्ति नहीं
पार्षद वार्ड की जनता और नगरपालिका प्रशासन के बीच सबसे निकट की लोकतांत्रिक कड़ी है। उसका काम केवल बोर्ड बनाने, अध्यक्ष या सभापति बैठाने और राजनीतिक जोड़-तोड़ में भाग लेने तक सीमित नहीं है।
बोर्ड बनाना राजनीति हो सकती है, लेकिन वार्ड सँभालना जिम्मेदारी है।
पार्षद से अपेक्षा होती है कि वह अपने वार्ड की समस्याएँ पहचाने, नागरिकों से संवाद करे, नगरपालिका अधिकारियों तक शिकायत पहुँचाए, उसका लिखित रिकॉर्ड रखे और समाधान होने तक उसका पीछा करे।
पार्षद स्वयं सफाईकर्मी या इंजीनियर नहीं होता, लेकिन वह यह कहकर मुक्त भी नहीं हो सकता कि—
“यह तो नगरपालिका का काम है।”
क्योंकि नागरिक ने उसे इसी नगरपालिका में अपनी आवाज बनाकर भेजा है।
वार्ड की किन समस्याओं पर पार्षद को ध्यान देना चाहिए?
एक जिम्मेदार पार्षद को अपने वार्ड की कम-से-कम इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करनी चाहिए—
- घर-घर कचरा संग्रहण और कचरा गाड़ी का समय
- सड़क किनारे बनते अनधिकृत कचरा-पॉइंट
- नालियों की सफाई और गंदे पानी की निकासी
- टूटी सड़कें, गड्ढे और क्षतिग्रस्त फुटपाथ
- बंद या खराब स्ट्रीट लाइट
- पार्कों और पैदल मार्गों का रखरखाव
- बेसहारा पशुओं से होने वाला खतरा
- जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और दुर्गंध
- अतिक्रमण से बाधित सार्वजनिक रास्ते
- मच्छर, गंदगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े खतरे
- वृद्धों, दिव्यांगजनों, महिलाओं और बच्चों की स्थानीय समस्याएँ
- जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 में भी नगरपालिका के प्रमुख कार्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य, सफाई, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल-निकास, सार्वजनिक मार्गों और स्थानों की सफाई तथा स्थानीय उपद्रवों को दूर करना शामिल है। यानी कचरा, गंदी नाली और असुरक्षित सार्वजनिक रास्ता कोई “छोटी-मोटी मोहल्ले की बात” नहीं, बल्कि नगरीय निकाय के मूल दायित्व हैं। राजस्थान स्वायत्त शासन विभाग—नगरपालिका के कार्य एवं जिम्मेदारियाँ
वार्ड सभा जैसी व्यवस्था आखिर क्यों जरूरी है?
हमारे यहाँ चुनाव के दिनों में वार्ड का प्रत्येक घर महत्वपूर्ण हो जाता है। उम्मीदवार दरवाजे तक आते हैं, हाथ जोड़ते हैं, समस्याएँ पूछते हैं और मोबाइल नंबर तक देकर जाते हैं।
चुनाव समाप्त होते ही वही समस्याएँ अनाथ हो जाती हैं।
क्या लोकतंत्र में नागरिक और पार्षद की मुलाकात केवल पाँच वर्ष में एक बार होनी चाहिए?
हर वार्ड में कम-से-कम दो या तीन महीने में एक खुली मोहल्ला बैठक हो सकती है। इसे वार्ड बैठक, जन-सुनवाई, नागरिक संवाद या मोहल्ला सभा—कुछ भी नाम दिया जा सकता है। जरूरी नाम नहीं, नियमित संवाद है।
ऐसी बैठक में—
- पिछली बैठक की शिकायतों की प्रगति बताई जाए।
- सफाई, सड़क, नाली, प्रकाश और पानी की समस्याएँ दर्ज हों।
- प्रत्येक शिकायत को क्रमांक और समय-सीमा दी जाए।
- नगरपालिका के संबंधित कर्मचारी या अधिकारी को बुलाया जाए।
- किए गए और प्रस्तावित विकास कार्यों का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- वार्ड की प्राथमिकताएँ नागरिकों की सहमति से तय हों।
- अगली बैठक की तारीख उसी दिन घोषित कर दी जाए।
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 60 में वार्ड समितियों के कार्यों में ठोस कचरा प्रबंधन में सहयोग, सफाई कार्य की निगरानी, वार्ड विकास योजना तैयार करने में सहायता, विकास योजनाओं का क्रियान्वयन, जनभागीदारी, पार्कों का रखरखाव और स्ट्रीट लाइट जैसी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रूप से बताई गई हैं। हालांकि धारा 54 के अनुसार औपचारिक वार्ड समितियों का अनिवार्य गठन तीन लाख या उससे अधिक आबादी वाली नगरपालिकाओं में होता है। छोटे नगरों में भी पार्षद अपनी पहल से नियमित जन-सुनवाई और मोहल्ला बैठक तो करा ही सकता है—इसके लिए तीन लाख की आबादी नहीं, केवल थोड़ी लोकतांत्रिक इच्छाशक्ति चाहिए। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009—धारा 54 एवं 60
वार्ड पार्षद के लिए एक सरल कार्य-प्रणाली
किसी बड़े बजट के बिना भी पार्षद अपने वार्ड में यह व्यवस्था बना सकता है—
प्रत्येक सप्ताह वार्ड भ्रमण
सप्ताह में एक दिन सुबह या शाम पैदल वार्ड का निरीक्षण किया जाए। गाड़ी के शीशे से वार्ड देखने और पैदल चलकर वार्ड समझने में बहुत अंतर होता है।
समस्या रजिस्टर
एक सार्वजनिक रजिस्टर या डिजिटल सूची बनाई जाए, जिसमें समस्या, स्थान, शिकायत की तारीख, संबंधित विभाग और वर्तमान स्थिति दर्ज हो।
मासिक रिपोर्ट
व्हाट्सऐप समूह या सूचना-पट्ट पर बताया जाए—
- कितनी शिकायतें मिलीं?
- कितनी हल हुईं?
- कितनी लंबित हैं?
- देरी किस स्तर पर हो रही है?
कचरा-पॉइंट पर विशेष कार्रवाई
जहाँ बार-बार कचरा डाला जाता है, वहाँ केवल सफाई करवाना पर्याप्त नहीं। अगले दिन फिर वही ढेर बन जाएगा। वहाँ नियमित कचरा वाहन, चेतावनी बोर्ड, नागरिक समझाइश, निगरानी और आवश्यकता होने पर जुर्माने की व्यवस्था साथ-साथ करनी होगी।
बेसहारा पशुओं पर समन्वय
सांडों और अन्य बेसहारा पशुओं की पहचान कर नगरपालिका के पशु-पकड़ दस्ते, गोशाला या संबंधित एजेंसी से समन्वय किया जाए। दुर्घटना होने की प्रतीक्षा करना प्रशासनिक नीति नहीं हो सकती।
चुनाव में उम्मीदवार से ये पाँच सवाल अवश्य पूछें
निकाय चुनाव निकट हों तो मतदाता केवल यह न पूछे कि उम्मीदवार किस दल का है। यह भी पूछे—
- आप वार्ड में जन-सुनवाई कितनी बार करेंगे?
- शिकायत दर्ज करने और उसकी प्रगति बताने की व्यवस्था क्या होगी?
- वार्ड की समस्याओं की सार्वजनिक सूची बनाएँगे या नहीं?
- नगरपालिका बैठकों में वार्ड से जुड़े कितने प्रश्न और प्रस्ताव रखेंगे?
- क्या हर तीन महीने में अपने काम का हिसाब जनता के सामने देंगे?
जो उम्मीदवार इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर नहीं दे सकता, वह चुनाव के बाद केवल आश्वासन दे पाएगा, उत्तरदायित्व नहीं।
और नागरिकों से भी दो टूक बात
सारा दोष पार्षद और नगरपालिका पर डालकर नागरिक अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
यदि कचरा गाड़ी आती है और फिर भी हम थैली सड़क के कोने पर फेंकते हैं, तो हम समस्या के पीड़ित ही नहीं, उसके निर्माता भी हैं। यदि कोई पड़ोसी सार्वजनिक रास्ते पर कचरा डालता है और हम संबंध बिगड़ने के डर से चुप रहते हैं, तो अगले दिन वही गंदगी हम सबके हिस्से आएगी।
समझाइश पहले हो, सामुदायिक अनुशासन उसके बाद और आवश्यक होने पर नियमानुसार दंड भी हो।
स्वच्छ वार्ड केवल सफाईकर्मी नहीं बनाते; नागरिक व्यवहार, प्रभावी व्यवस्था और जवाबदेह जनप्रतिनिधि मिलकर बनाते हैं।
माननीय पार्षद जी, बोर्ड बन गया—अब वार्ड भी बना दीजिए
चुनाव जीत गए। जोड़-तोड़ की राजनीति कर ली। बोर्ड बन गया। अध्यक्ष या सभापति भी बैठा दिया गया। मालाएँ पहन लीं, अभिनंदन करा लिया और विजय-जुलूस की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर आ गईं।
अब जरा उस भोली-भाली मोहल्ले की जनता की ओर भी देख लीजिए, जिसने आपको वोट देकर वहाँ पहुँचाया है।
उसे रोज नई सड़क नहीं चाहिए। पहले पुरानी सड़क से कचरा हटवा दीजिए।
उसे हर गली में प्रवेश-द्वार नहीं चाहिए। पहले स्ट्रीट लाइट जलवा दीजिए।
उसे बड़े-बड़े भाषण नहीं चाहिए। महीने में एक बार बैठकर उसकी समस्या सुन लीजिए।
और यदि संभव हो तो कभी सुबह पैदल अपने वार्ड में घूम आइए। हो सकता है आपको भी वही कचरे का पहाड़ और वही सांड मिल जाएँ, जिनसे बचते हुए हम निकलते हैं।
तब शायद समझ आएगा कि वार्ड केवल चुनावी नक्शे पर बनी एक सीमा नहीं है। यह जीवित लोगों की बस्ती है—जहाँ बच्चे खेलते हैं, बुजुर्ग टहलते हैं, महिलाएँ निकलती हैं और नागरिक अपने कर के बदले न्यूनतम स्वच्छता, सुरक्षा तथा सम्मान की अपेक्षा रखते हैं।
लोकतंत्र में मतदान जनता का अंतिम कर्तव्य नहीं और चुनाव जीतना पार्षद की अंतिम उपलब्धि नहीं।
असल काम तो उसके बाद शुरू होता है।
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