बुझोबल पहेली संग्रह को समर्पित रचना मनीष “माना” द्वारा

सुप्रसिद्ध कवि महादेव प्रेमी द्वारा संकलित एवं रचित प्रथम पुस्तक बुझोबल को समर्पित यह रचना

बूझोबल से अपने बुझोबल

रोचक ज्ञानवर्धक पहेलियां,

जीवन खुद है एक पहेली

पर’ प्रेमी’ जी की लगती है सहेलिया |

मुस्कराती ,बहलाती,गुदगुदाती

दिमाग में हलचल मचाती ,

कानपुर में पैर पसारो, नयनापुर में रहो ,

पहेलियाँ आपको जीवन दर्शन कराती|

क्या नहीं देखा,क्यों नही देखा,

सूर्य ने पृथ्वी पर क्या नहीं देखा

नही देखा नही देखा नही देखा

आप महादेव जी जैसा ‘बुझोबल” नहीं देखा|

सूरज के बाद क्या,

कहते है एक निशा है

पूछते है उत्तर क्या

बूझते है ,एक दिशा है |

पहेलिय कुल ५१०

बीत गया जो कल ,आने वाला है जो कल

सुलझाओ पहेली आज में

‘प्रेमी “जी का प्रेम है बुझोबल

रचनाकार -कवि मनीष माना गंगापुर सिटी

Boojhobal (बूझोबल)- A collection of interesting and enlightening original puzzles

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