डाॅक्टर, नर्स, सफाईकर्मी, पुलिस
या चाहे हो वो पत्रकार
विपत्ति की विकट घड़ी में
लगते स्वयं ईश्वर का अवतार
स्वहित त्याग कर लोकहित के लिए
जिन्होंने त्यागा अपना घर-बार
उन्हीं में ढूंढो उसको, जिसके लिए
तुम जाते मन्दिर मस्जिद या गुरुद्वार
शत शत नमन भी कम पड़ते हैं
ये मानवता के सच्चे कर्णधार
न फेंको पत्थर, न रोको राहें
कुछ तो सोचों, कुछ तो करो विचार
कोरोना सहस्त्र फन फैलाए खडा है
बन्द करो उसके मुंह पर, अपने द्वार
घर पर रहो , हाथों को धोओ, मर्यादित रहो
पूर्वजों ने हमारे, हममें डालें
जीओ और जीने दो के संस्कार
– सुनीता मृदुल
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