डूबने की फिलासफी
एक अजूबा दुनिया का
समझों मित्र सुजान
जीवित देह जल डुबती
क्यों तैरे मुर्दा जाण? (1)
काम क्रोध अभिमान के
भार होत ज्यों भारी
जिन कारण जीवित मिनख
डूबत जल गहराई। (2)
अंत समय यमदूत ज्यो
. बांधे कर्म और प्राण
मृत शरीर हल्का पडे़
. तैरे जल में जाण। (3)
मुरदे जल में तैरते
. है अचरज की बात
पाप गठरियाँ बांध के
जीवित डूबत जात । (4)

डा राम कुमार जोशी
जोशी प्रोल, सरदार पटेल मार्ग
बाड़मेर 344001
rkjoshi1601@gmail.com
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