डूबने की फिलासफी-छंद रचना

Ram Kumar Joshi

Ram Kumar Joshi

डा राम कुमार जोशी ललित कुंज, जोशी प्रोल सरदार पटेल…

डा राम कुमार जोशी ललित कुंज, जोशी प्रोल सरदार पटेल मार्ग, बाड़मेर (राज) [email protected]

Comments ( 6)

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Vidya Dubey

1 year ago

सुंदर रचना 👌👌

डॉ मुकेश 'असीमित'

1 year ago

आभार आपका आदरणीय

डॉ मुकेश 'असीमित'

1 year ago

आपकी इस भावपूर्ण प्रतिक्रया के लिए आभार

Navneet Vyas

1 year ago

आपकी दर्शन युक्त इस कविता पर कमेंट करने की तो क्या समझने की अल्प बुद्धि भी मेरे में नही है। पर जिवित देह जो पाप के भार से डूबती जा रही है पर उससे अच्छी निष्प्राण निष्ष्क्रिय देह है जो पाप नही करती है; तैरती है। इस उपमा ने यह संदेश दिया है कि पापियों तुमसे तो मुर्दे भी अच्छे है।

रश्मिकांत मेहता

1 year ago

सुंदर रचना
शब्द सौंदर्य से अभिभूत करती रचना
नैतिक ज्ञान तो हे ही साथ में सजीव बोध की रसमय रचनाएं।
छोटी छोटी पर सागर की बात करती रचना