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“महारास: राधा–कृष्ण की लीलाओं में कवियों का अमर रस”

"अमूर्त रेखाचित्र जिसमें चाँदनी रात के नीचे वृंदावन कुंजों में राधा-कृष्ण गोपियों संग महारास रचाते हुए, चारों ओर नृत्य, मुरली की धुन और काव्य-पदावलियों की आभा बिखरी हुई।"

 नंददासजी – रास पंचाध्यायी से चयनित पद

 रास आरंभ का दृश्य

गोपियों का आकर्षण और मुरली की टेर

महारास का नृत्य और अलंकार

 गोपियों का हाव-भाव और श्रृंगार

महारास की माधुरी और रस का वर्णन

निष्कर्ष और रस का सार

डॉ. मुकेश असीमित—साहित्यिक अभिरुचि, हास्य-व्यंग्य लेखन, फोटोग्राफी और चिकित्सा सेवा में समर्पित एक संवेदनशील व्यक्तित्व।
डॉ. मुकेश असीमित
✍ लेखक, 📷 फ़ोटोग्राफ़र, 🩺 चिकित्सक

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