अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश – एक गीत

अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश – एक गीत

थकान  की धूप में भी हम मुस्कान बोते हैं,
रातों की राख पर नयी सुबहें संजोते हैं,
इन सूनी आँखों में सपने हजार पलते  हैं—
अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश लिए चलते हैं।

उँगलियाँ काँपती हों पर इरादा खड़ा रहता,
क्षत विक्षत हो तन ,फिर भी मन आगे बढ़ा रहता,
दर्दों की नदी में भी साहस के दीप जलते हैं ,
अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश लिए चलते हैं।

दुनिया की भीड़ में जब दृष्टि भरमाती है,
दया की धुंध अक्सर हमें विकल कर जाती  है,
हम फिर भी सत्य की मशालें लिए चलते हैं
अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश लिए चलते हैं।

टूटी श्वास में भी सपनों की घंटी बजती,
कंपित पगडंडी पर भी मंज़िल की राह सजती,
हँसकर हर पतझड़ के भीतर बसंत भरते हैं —
अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश लिए चलते हैं।

रोकें यदि हवाएँ तो रुख़ अपना बदलते हैं,
कठिनाई की आँच में हम और निखरते हैं,
जीवन के रण में हर बाधा पार किये चलते हैं ,
अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश लिए  चलते हैं।

मंज़िलें कभी हमें, कभी हम उन्हें बुलाते,
शब्दों में अपने दर्द को अमृत-सा मिलाते,
धरती से बँधे रहकर भी ऊँचाई से न डरते हैं
अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश लिए चलते हैं।

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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