अलविदा पच्चीस!-kavita-dr mueksh

अलविदा पच्चीस!


वर्ष पच्चीस बीत गयो रे ,
जग मन अजब उमंग।
किसी को टीस, कोई बिन संग ,
कोई जग जीत गयो रे ॥

सन दो हजार पच्चीस के,
तीन सौ तिरेसठ दिन,
कोई हँसता, कोई रोता,
कोई विकल प्रीति बिन?

किसी को ‘मिस’, किसी को ‘किस’,
किसी को जीवन पाठ ,
कोई तौले नफा-नुकसान,
कोई डोले—सूने  घाट॥
वर्ष पच्चीस

किसी की खिंची साल भर खाल,
किसी ने भरा खजाना,
कोई दर-बदर  भटका फिरा,
कोई ओढ़े शॉल पुराना।

कोई देता रहा गालियाँ,
कोई सुनता रहा चुपचाप ,
कोई निकली फर्जी दुल्हन ,
कोई निकला फर्जी बाप ॥
लखि वर्ष पच्चीस

किसी की भागी घरवाली  ,
किसी के संग  भागी साली,
किसी ने साधुता ओढ़ी,
किसी ने बुरी आदत पाली।

कोई बच-बच कर बकता रहा,
पढ़ा रह उल्टी पाटी ,
कोई वर्ष भर झेलत रहा,
मुसीबत की सौ-सौ लाठी ॥
वर्ष पच्चीस

जितने जन, उतने दर्शन,
झूठ  का रोना तौबा ,
कोई बना स्याना जग में,
कोई रहा पूरा कौवा ।

किसी की पौबारह हो गई,
कोई ग्यारह-का-एक,
कोई फर्राटा भरता फिरा,
कोई पहुँचा घुटने टेक॥
वर्ष पच्चीस

कोई खटता रहा दिन-रात,
कोई हर बात पे नाटक करता ,
कोई उलझा दिल्ली नगरी,
कोई घर पानी भरता ।

आठ अरब के  राशन को ,
बारह में दिया  बाँट,
किसी को नमक नसीब हुआ,
किसी  की घिसती रही टान्ट ॥
वर्ष पच्चीस

कोई बना सेठ-सा टाटा,
कोई खाता चांटा,
कोई लंबू बनकर निकला,
कोई रह गया नाटा।

किसी ने पहनी गोटे-किनारी,
कोई हो गया मोटा,
किसी को लाभ अपार मिला,
किसी का पूरा टोटा॥
लखि वर्ष पच्चीस

किसी ने ढाए साल भर सितम,
किसी को मिली किलकारी  ,
किसी के घर अर्थी उठी,
कोई करता रहा बेगारी ।

कोई चोखी ढाणी भटका रहा,
कोई मोबाइल ज्ञानी,
किसी ने सूनी बुजुर्गों की ,
कई करते रहे मनमानी ॥
वर्ष पच्चीस

कुछ भटके, कुछ अटके ,
भगौड़े  धूनी रमाए,
कोई जिम्मेदारी से भागा,
लम्पट कई लंका ढहाए ।

जनता ने सरकार चुनी,
वर्ष भर चली  कहासुनी,
कोई चाहे फिर आए पच्चीस,
पर वक्त ने किसकी सुनी?॥
वर्ष पच्चीस

खून का घूंट पी रमते रहे,
कई निर्दोष बने खूनी,
हे प्रभु! छब्बीस में किसी की,
मांग न रह जाए सूनी।

सब खुश रहें, सुख पावें जन,
हे प्रभु जगदीश ,
अलविदा पच्चीस!
पधारो वर्ष छब्बीस!

वर्ष पच्चीस बीत गयो रे ,
जग मन अजब उमंग।
किसी को टीस, कोई बिन संग ,
कोई जग जीत गयो रे ॥

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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