मातृत्व का आधार – संसार का संचालन -The basis of motherhood – the running of the world

Dr Shree Gopal Kabra Jun 11, 2021 Blogs 0

स्त्रीत्व, नारीत्व और मातृत्व का संचालन केन्द्र - डिम्बग्रन्थि है? -कि स्त्रीत्व का व्यक्त रूप होता है, रोएं विहीन कोमल त्वचा, आकर्षक शरीर सौष्ठव, स्तन और नितम्ब, प्रजनन-सृजन की इच्छा, आतुरता, और ममत्व एवम् वात्सल्य के कोमल भावों की प्रकृति व प्रवृत्ति। स्त्रीत्व की इस नैसर्गिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति की प्रेरणा, संचालन और संवर्द्धन का केन्द्र होती है डिम्बग्रन्थि।

घातक और अघातक रोगो का विज्ञान

Dr Shree Gopal Kabra Jun 2, 2021 Blogs 0

जैविक संसार में कुछ भी शत प्रतिशत सत्य नहीं होता और न ही कोई सच शास्वतघातक रोग व व अघातक जीवन प्रभावी रोगडॉ. श्रीगोपाल काबरास्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले रोगों की दो प्रमुख श्रेणियां होती हैं – घातक, जो शुरू से ही घातक प्रकृति के होते हैं। अल्पकाल में मृत्यु की संभावना लिए। अघातक जो […]

चिकित्सा के अयाम-Clinical Dimension -Dr S. G . Kabra

Dr Shree Gopal Kabra May 29, 2021 Health And Hospitals 0

आदिकाल से चिकित्सक, रोग और व्यधियों का व्याख्यात्मक स्पष्ठिकरण देने को सतत चेष्ठारत रहे हैं। रोग स्पष्ठिकरण की ऐसी परिकल्पना (थ्योरी) जिसे व्यापक मान्यता मिले। यह उनके चिन्तन का प्रमुख विषय रहा है। आदिक्रम से देखें तो कभी भूत-प्रेत और दुष्ट आत्मोओं को रोग और व्याधियों का कारक माना जाता था और उनसे निवारण, चिकित्सा। […]

हाइपोथीसिस – परिकल्पना कैंसर क्यों होता है। Hypothesis about Cancer

Dr Shree Gopal Kabra May 26, 2021 Blogs 0

ह्यूमर हाइपोथीसिस – आंतरिक द्रव-विकार परिकल्पना। हिप्पोक्रेटस की आदि काल की शरीर के अंदर 4 द्रव की परिकल्पना को, पांच शताब्दि बाद, ग्रीक चिकित्सक गेलेन ने प्रतिपादित किया। गेलेन ने इन्हे कार्डिनल फ्लूइड्स – मुख्य आधार- द्रव की संज्ञा दी। इस परिकल्पना के अनुसार शरीर में 4 द्रव लाल, सफेद, पीला, और काला होते थे। […]

कोशिकाओं में आत्मघात व संथारा-lYSOSOME -SUICIDAL BAGS

Dr Shree Gopal Kabra May 26, 2021 Blogs 0

भ्रूण के सृजन काल में जब अंगों का विकास हो रहा होता है तब चयनित कोशिकाओं का अंग में समायोजन, और शेष का संथारा कर विलुप्त होना एक सतत प्रक्रिया है। अंगों में समायोजित न हुई कोशिकाएं अपनी उपादेयता चुक जाने पर संथारा द्वारा अपना जीवन त्याग कर अवशोषित हो जाती हैं। हथेली में अलग अलग ऊंगलियां बनती हैं क्यों कि उनके बीच की कोशिकाएं संथारा कर विलुप्त हो जाती हैं। ऐसे ही कुछ आश्चर्यजनक तत्थ्य जानिये डॉ एस जी काबरा के लेख में ,कोशिका की आत्मघाती थैली lysosome के बारे में

कोशिका का आंतरिक समाज शास्त्र-Cellular internal social science

Dr Shree Gopal Kabra Apr 2, 2021 Blogs 0

Dr S G Kabra has beautifully described the whole social science framework present in our each cell. हर नन्ही-सी, आँखों से न दिख ने वाली, जिसे देखने के लिए माइक्रोस्कोप (सूक्ष्मदर्शी यंत्र) चाहिए, ऐसी कोशिका में भी विलक्षण संसाधन, सामाजिक संरचना और प्रशासनिक व्यवस्था होती है। यानी कण कण में विधि-विधान। Human anatomy is really a wonder world .

जड़बुद्धि जीनियस – विक्लांग विद्वान

Dr Shree Gopal Kabra Jan 25, 2021 Blogs 0

मनसिक कमी के रहते हुए किसी विशेष क्षेत्र में कौशल या प्रतिभा कैसे संभव होती है इसके लिए अवधारणा है कि उनकी मानसिक प्रतिक्रिया विशिष्ट क्षेत्र में घनीभूत होकर अति-सक्रिय हो जाती है। पढ़े डा एस जी काबरा द्वारा लेख जो बट्टा है कुछ उदाह्र्नो के साथ कैसे जड़ बुद्धि का व्यक्ति भी अप्रत्याशित विलक्षण क्षमता, दक्षता या प्रतिभा दिखा सकता है ऐसे ही लेख कविता आदि पढने के लिए जुड़े रहिये बात अपने देश की से

जल ही जीवनः शरीर का जल संसाधन केन्द्र – गुर्दा

Dr Shree Gopal Kabra Jan 24, 2021 Blogs 0

पढ़े डा एस जी kabra द्वारा लिखित शरीर की अद्भुत गुर्दा अंगो की कार्यप्रणाली ,जो की कैसे एक RO aquaguard की तरह रक्त की सत् शुद्धि के लिए २० लाख के करीब ऐसे उपकरण लगाए हुए है ऐसे ही लेख के लिए जुड़े रहिये बात अपने देश की से

प्राण प्रणेता पौरुष पुंज आपके शुक्राणु डॉ. श्रीगोपाल काबरा

Dr Shree Gopal Kabra Jan 3, 2021 Blogs 0

प्राणियों के प्राण प्रणेता - प्राणनाथ - शुक्राणु ही होते हैं। पढ़िए रोचक तथ्यात्मक जानकारी शुक्रानुओ के बारे में लेख डा एस जी काबरा द्वारा प्रकाशित जुड़े रहे बात अपने देश की से ऐसे ही रोचक जानकारियों भरे लेख के लिए