डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 29, 2025
व्यंग रचनाएं
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*"ए.सी. डिब्बे की यात्रा कई बार हॉरर फिल्म जैसी लग सकती है। सफेद चादर ओढ़े यात्री ममी जैसे लगते हैं, और चौकीदार हाथ में लालटेन लिए किसी भूतहा हवेली का गार्ड प्रतीत होता है। मोबाइल की टॉर्च से सीट नंबर खोजना किसी रहस्यमयी लिपि पढ़ने जैसा अनुभव बन जाता है। सच मानिए, 'मम्मी रिटर्न्स: ए.सी. कोच एडिशन' किसी भी थ्रिलर मूवी को मात दे सकती है।"*
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 29, 2025
Art and Craft
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गणेश झांकी में महारास का आयोजन बचपन की रासलीला की याद दिला गया। परंपरागत पदावली और छंदों की जगह आज डीजे और पैरोडी ने ले ली है। सोचिए—यदि रसखान, नंददास, कुम्भनदास और घनानंद के पद फिर मंचित हों, तो कैसा दिव्य वातावरण बनेगा। इन कवियों ने भक्ति, प्रेम, श्रृंगार और विरह के रंगों से रासलीला को अमर और अनंत माधुरी का अनुभव बना दिया है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 28, 2025
Important days
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गणेश चतुर्थी विशेष अवसर पर प्रस्तुत वंदना में गणपति को विघ्नहरण प्रथमेश्वर, पार्वतीसुत, मोदकप्रिय, गजवदन और सिद्धिदाता के रूप में नमन किया गया है। वे करुणाकर, बुद्धिप्रदाता और भक्तजनप्रिय हैं, जो दुख हरकर मंगल का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जगद्वंद्य गजानन का स्मरण जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 28, 2025
लघु कथा
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शहर के सात सितारा आईसीयू के बाहर रिश्तेदार चाय की चुस्कियों और तानों में लगे हैं। अमन का दिल पिता की वेंटिलेटर पर गिनती करती साँसों और नौकरी के अल्टीमेटम के बीच झूल रहा है। इसी बीच ‘संस्कार प्लानर प्राइवेट लिमिटेड’ वाला इवेंट मैनेजर प्रवेश करता है, शोकसभा का पैकेज थमाते हुए। रिश्तों की अंतिम सांसों को मशीनें खींच रही हैं और संवेदनाएँ कॉर्पोरेट पैकेज में बदल रही हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 27, 2025
व्यंग रचनाएं
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गणेश चतुर्थी पर जहाँ सब गणपति की स्तुति करते हैं, वहीं उनके वाहन मूषकराज की महिमा भी अद्वितीय है। छोटे आकार में विराट शक्ति का प्रतीक मूषक राज निर्माण और विनाश दोनों का पाठ पढ़ाते हैं। राजनीति की गलियों से लेकर धर्म की रणभूमि तक, उनकी चपलता और सजगता हमें सिखाती है कि सत्य के मार्ग पर बड़ा बनने के लिए आकार नहीं, बल्कि बड़ा दिल चाहिए।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 27, 2025
India Story \बात अपने देश की
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शहर में चंदागिरी का धंधा खूब फल-फूल रहा है—यह दरअसल हफ्तावसूली का ही सभ्य संस्करण है। देवी-भक्त मंडल से लेकर राम-गौ-गणेश मंडल तक सबके चूल्हे चंदे की रोटी से जलते हैं। चंदावीर साम-दाम-दंड-भेद की सनातनी तकनीक से लोगों को घेरते हैं, कभी गाय-भक्ति तो कभी आयोजन के नाम पर। राजनीति भी वोट और चंदे की संयुक्त प्राणवायु पर टिकी है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 25, 2025
व्यंग रचनाएं
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"आ गए मेरी शादी का तमाशा देखने! नाना पाटेकर की झुंझलाहट, दूल्हे का डर और रिश्तेदारों की हंसी—पूरा दृश्य किसी फिल्मी फाँसी के सीन जैसा है। उधार का सूट, किराए की मुस्कान और भारी लिफाफों के बीच दूल्हा खुद को हलाल होने वाले बकरे सा महसूस कर रहा है। भीड़ के लिए यह रिसेप्शन नहीं, तमाशा है—और दूल्हे के लिए, ज़िंदगी की सबसे बड़ी सज़ा।"
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 23, 2025
व्यंग रचनाएं
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“मैं और मेरा मोटापा – एक प्रेमकथा” में तोंद और इंसान का रिश्ता मोहब्बत जैसा दिखाया गया है। पड़ोसी शर्मा जी की खीझ, रिश्तेदारों की चेतावनी, सरकार की घोषणाएँ—सब बेअसर! मोटापा हर वक्त साथ है, जैसे जीवन-संगिनी। चेतावनी बोर्ड उखाड़कर समोसे खाने की जिद और गोल फिगर को भी गौरव मानना—यह व्यंग्य सिर्फ़ शरीर नहीं, पूरे समाज की मानसिकता पर कटाक्ष है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 22, 2025
Book Review
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The well-known humorist, blogger, and satirist Dr. Ankit Sharma—who is not just a “doctor by name” but also by profession—recently read my book Roses and Thorns. This review is shared exactly as I received it. And playfully, if you still feel my book (₹190) isn’t worth it, recover your money directly from him! 😀
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 22, 2025
व्यंग रचनाएं
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भागम-भाग की ज़िंदगी का असली गणित है—भाग को भाग दो, और उत्तर आएगा ‘आराम’। खाट पर लेटना, कम्बल में दुनिया की फिक्र लपेटना ही असली दर्शन है। काम दुखों की जड़ है, पर आराम में पहले से ही राम बसे हैं। खरगोश दौड़ता है, कछुआ जीतता है, क्योंकि वो आराम से चलता है। तो मेरी मानो—खाट बिछाओ, पैर फैलाओ और कलयुग के मोक्ष ‘आराम’ का आनंद लो।