जंतर मंतर और छूमंतर!
डॉ प्रेमचंद द्वितीय
मॉर्निंग वॉक के दौरान पंडित शिवनारायण जी रात को घर में दिखे कॉकरोच को लेकर चिंतित होकर बोले जब से कॉकरोच की पार्टी ने अपना दबदबा बनाया, साले सारे के सारे कॉकरोच बाहर दिखने लगे है जो घर में सालों से नहीं दिखते थे ।शायद उन्हें भनक लग गई कि हम काकरोचों के नाम से बनी पार्टी कितनी चर्चित और प्रभावशाली है। कॉकरोच की लोकतंत्र में इंट्री से कॉकरोच बहुत खुश हो गए और अपनी बिरादरी के कांकरोचों से बोला कि सालो औंधे मत गिर जाना वरना छटपटाते रहोगे ,सीधे नहीं हो पाओगे ।इसलिए कि औंधे गिरने पर तुम्हें कोई सीधा नहीं करेगा और पूरा सिस्टम भी सीधा नहीं करने में भिड़ जाएगा ।
खैर मॉर्निंग वॉक में जब कॉकरोच और कॉकरोच से जुड़ी पार्टी के आंदोलन स्थल ,जंतर मंतर, का भी जिक्र आया और उस पर बहस होने लगी तो सुनील भैया बोले कॉकरोचों ने जिस. जंतर मंतर पर डेरा डाला वह जंतर मंतर स्थल यंत्र-मंत्र तंत्र को अपने में समेटे हुए होता है इस स्थल की जादूगरी से यंत्र और मंत्र तो ,जंतर मंतर, में प्रचलित हो गए और तंत्र इस जंतर मंतर पर तंतर करने लगा । तंत्र के तंतर से जंतर मंतर पर होने वाले कई आंदोलन छूमंतर भी हो गए और कई मर्तबा जंतर मंतर का इतना जादू चला कि तंतर यानी तंत्र स्वयं छूमंतर हो गया और इस जंतर मंतर का इतना दबाव बनता है कि तंतर भी ,लोकतंतर, में तब्दील होने के लिए मजबूर हो जाता है। जंतर मंतर की ताकत का बखान करते हुए पवन बाबू बोले ,जंतर मंतर, पर लगी आवाज और जुमलेबाजी ,नारेबाजी सीधे-सीधे संसद तक पहुंचती है ।यही एक ऐसी जगह है जो इतनी लोकप्रिय की हर कोई जंतर मंतर के अहाते में आकर अपनी मांग को मनवाने का ताबीज बांधते हैं और सफल होने की तजबीज करते हैं ।
इस पर तंत्र-मंत्र में भरोसा रखने वाले राम जी बोले झाड़ फूंक कर ,ताबीज गंडे बांधकर जंतर मंतर करने वाले हमेशा जादूगर कहलाने लग जाते हैं। गड़ा धन निकालने के लिए जादू टोने, टोटके अक्सर निजी तौर पर होते हैं लेकिन बड़ी-बड़ी मांगों और बड़े-बड़े आंदोलन के लिए जंतर मंतर ने जो जगह बनाई है वह और किसी मैदान यानी रामलीला या किसी प्लेस से कम नहीं है।
जन आंदोलन में अपना सर्वोच्च स्थान रखने वाले जंतर मंतर से अनेक फर्श से अर्श पर पहुंच गए और कई औंधे मुंह ऐसे गिरे कि कॉकरोच की तरह फिर कभी सीधे नहीं हो सके। गिराने और उठाने में जंतर मंतर को महारत हासिल है ।
वे बोले जंतर मंतर से लोकतंतर के बहुत, तंतर ,चलते हैं। जंतर मंतर लोगों को तंतर से जुड़ने और तंतर की कमियों को उजागर करने का एक प्राकट्य स्थल भी है ।वे बोले जंतर मंतर खगोलीय जानकारी के लिए होता है जिसे वेधशाला भी कहते हैं। देश में स्थापित जंतर मंतर समय को मापता है तथा ग्रहण की भी भविष्यवाणी करता है। जंतर मंतर पर आंदोलन करने वाले कईयों को ग्रहण भी लग लग जाता है और समय को मापने के दौरान जंतर मंतर कईयों को ,टाइम आउट ,भी कर देता है ।
जंतर मंतर की बहस में प्रोफेसर रामेश्वर जी भाग लेते हुए बोले जंतर मंतर वस्तुतः यंत्र और मंत्र का अपभ्रंश है। और अपनी अपभ्रशंता के कारण यह स्थान जंतर मंतर कईयों को छूमंतर भी कर देता है ।यहां अनेक प्रदर्शन आंदोलन,अनशन, धरना, गिरना उठना ,भागना ,छिपना अक्सर होते रहते हैं ।आंदोलन में असफल होने होने वालों को ,जंतर मंतर, से छूमंतर भी होना पड़ता है। जंतर मंतर पर तंत्र को यानी तंतर को हमेशा तैनात रहना पड़ता है। जंतर मंतर पर होने वाले आंदोलन में अनेक घिसे पिटे ,सत्ता से हटे ,फ्लाप नेता भी मंतर मनवाने पहुंच जाते हैं। ताकि जंतर मंतर से फिर वे सत्ता से तार तार हुए ,फिर से, तर, हो जाए।
इस पर नरेंद्र स्वामी जी बोले जंतर मंतर हल्का-फुल्का नहीं है ।इस जंतर मंतर पर दो-दो साल से अधिक आंदोलन चलते हैं जो इतिहास में अपना और जंतर मंतर दोनों का नाम दर्ज कराते हैं ।चाहे वह वन रैंक वन पेंशन का आंदोलन हो या किसानों का लंबा आंदोलन हो ,जंतर मंतर में वह जादू है कि वह मांगों को मनवा देता है ।इस कारण जंतर मंतर सैनिक ,किसान, युवा ,बाबा ,साधु ,संयासी ,राजनीतिक दल ,लीक से हटकर लीकेज का आंदोलन, पेपर लीकेज आदि मांगों को मनवाने के आंदोलन कराने के लिए मशहूर माना जाता है । जंतर मंतर जहां आंदोलन को ऊंचाईयां देता है वही वह ऐसे आंदोलन को ,छूमंतर, के जरिए ऐसा गायब करता है कि वह दोबारा जंतर मंतर तक अपना मुंह नहीं दिखा पाते हैं ।हालांकि छूमंतर ,डिसएपीयर, होना कहलाता है ।लेकिन जब तक वह जंतर मंतर से कनेक्ट नहीं होता है तब तक वह मंतर या छूमंतर नहीं बज पाता है ।वैसे भी छूमंतर जादू टोने,झाड़फूंक,अचानक गायब होने का पर्याय है ,मक्कारी फरेबी भी छूमंतर से जुड़ी है लेकिन जब तक जंतर मंतर से छूमंतर नहीं जुड़ता है तब तक छूमंतर की कोई औकात नहीं है ।वे बोले जंतर मंतर तंतर और छूमंतर ऐसे हैं जो तर करना तो जानते हैं वहीं यदि वह किसी को छू ले तो ,तार तार ,करने से भी नहीं चूकते है!
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डॉ मुकेश 'असीमित'
1 hour agoजंतर-मंतर, लोकतंत्र, आंदोलन और कॉकरोच-पार्टी के बहाने राजनीतिक तंत्र पर तीखा हास्य-व्यंग्य—पढ़िए डॉ. प्रेमचंद द्वितीय की रचना “जंतर मंतर और छूमंतर!”