लौटी हुई रचना,,,
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प्रदीप औदिच्य
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मन, कर्म ,वचन को एक साथ टेबिल पर रख कर , ये बात कह रहा हूं, कि ये रचना किसी सम्पादक के
खिलाफ नहीं है।
इस घोषणा के बाद कोई बुरा मान कर इस रचना को छापने से मना कर देता है तो हम बुरा नहीं मानेंगे।
एक लेखक या कवि के मन में किसी विषय का गर्भ धारण होने के बाद उसकी प्रसव पीड़ा बड़ी कठिन
होती है।लेखक अपनी पूरी बुद्धि की ताकत लगाकर उसे जन्म देता है।
वाक्य , मात्रा सुधार कर रचना को पालता पोसता है।
फिर एक दिन किसी पत्र पत्रिका के लिए भेज देता है जैसे बेटी की घर से विदा कर दी हो।
अब फिर कुछ दिन बाद उसकी याद को भुलाने की कोशिश करता है। जैसे ही कुछ भूलता है तो एक दिन
मेल आई डी पर संपादक के खेद के साथ रचना लौट आती है,और लेखक की याद भी।
रचना वापिस हो गई। ये देखकर लेखक को लगता है कि खेद जताना सबसे खराब शब्द है।झटके से उबर
कर वह सोचता है कि क्या वह खराब कवि है या संपादक खराब है।ये झटका नए कवि को जोर का लगता
है। दो तीन कविता संग्रह का विमोचन कर चुका कवि रचना में फेरबदल कर दूसरे संपादक को भेज देता
है ,जैसे सेकेंडहैंड स्कूटर का मिस्त्री हो।
इसे ऐसे भी कह सकते है कि आप बैटरी फुल के लिए मोबाइल चार्ज करते है। ।एक घंटे बाद जब
मोबाइल उठाते है तो देखते है कि बिजली का स्विच बंद ही था।
जो हाल उस समय मन और मस्तिष्क का होता है लगभग वही हाल रचना वापिस के समय लेखक या
कवि का होता है ।
किसी भी पत्र पत्रिका का साहित्य सम्पादक आई ए एस की तरह होता है ।
जैसे किसी सीनियर आई ए एस को हर एक विभाग का काम आता है।वह कृषि भी जानता है।वित्त
विशेषज्ञ भी है और सरकार उसे टेक्नोलॉजी के काम भी दे देती है।ऐसे ही साहित्यक पेज का संपादक
कविता ,कहानी ,व्यंग्य ,लघुकथा,यात्रा संस्मरण ,हर विधा में पारंगत होता है वह एक नजर में बता देता है
कि ये छापने लायक है या नहीं। कभी कभी तो लेखक के नाम से ही रचना का काम हो जाता है।
लौटी हुई रचना शहर से नौकरी छोड़कर आए हुए लड़के की तरह होती है।घर वाले उसे घर में रहने तो देते
है लेकिन उसे उतना प्रेम नहीं देते जैसे पहले देते थे।
लौटी हुई रचना भी कई दिन तक ऐसे ही कही पड़ी रहती है ।
Pradeep Audichya
Aug 4, 2026
व्यंग रचनाएं
1 Comments
Comments ( 1)
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डॉ मुकेश 'असीमित'
6 minutes agoसंपादक के “खेद सहित” लौटाई गई रचना लेखक को कितना विचलित करती है? साहित्य, संपादन और रचनाकार की मनोदशा पर प्रदीप औदिच्य का रोचक व्यंग्य।