Prem Chand Dwitiya
Apr 8, 2026
व्यंग रचनाएं
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रंग बदलने के पुराने उस्ताद गिरगिट भी आजकल इंसानों की रंगबाज़ी से हैरान हैं।
सुरक्षा के लिए रंग बदलने वाले जीव अब अपनी साख बचाने की बैठक कर रहे हैं।
व्यंग्य यह है कि बदनाम गिरगिट हैं, मगर रंग बदलने की असली महारत इंसानों ने हासिल कर ली है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 8, 2026
लघु कथा
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चीखें हवा में तैर रही थीं, पर सायरनों की आवाज़ ने उन्हें ढँक लिया—व्यवस्था का संगीत शुरू हो चुका था।
लाशें लाइन में सजा दी गईं—मृत्यु के बाद भी अनुशासन लागू था।
कैमरे तैयार थे, आँसू भी—बस ‘सीन’ सेट होना बाकी था।
और अंत में वही वाक्य—“हालात काबू में हैं।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 5, 2026
व्यंग रचनाएं
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“मैं उस दौर का अनाम प्रेमाचार्य था, जिसने प्रेम के सर्वहारा वर्ग के लिए जनहित याचिका की तरह प्रेमपत्र लिखे—निःशुल्क, निस्वार्थ और निस्संग।”
“बिना शायरी के प्रेमपत्र ऐसा ही होता जैसे दाल बिना तड़के।”
“एक ही प्रेमिका के लिए लिखते-लिखते हम भी ऊब गए—पर प्रेमियों के दिलों में आग बराबर जलती रही।”
Dr Shailesh Shukla
Apr 5, 2026
India Story \बात अपने देश की
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सोशल मीडिया ने एक देश में कई समानांतर वास्तविकताएँ बना दी हैं
एल्गोरिद्म हमें वही दिखाते हैं जो हम देखना चाहते हैं
झूठी खबरें सच्चाई से तेज़ फैलती हैं
डिजिटल ध्रुवीकरण लोकतंत्र के लिए खतरा बन चुका है
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 4, 2026
व्यंग रचनाएं
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बब्बन चाचा ने परदादा की संदूक में रखी मूँछें निकालकर इतिहास को चेहरे पर चिपका लिया। अब वे हर सुबह ‘इतिहास अलाप’ करते हैं और वर्तमान को ताले में बंद कर देते हैं—क्योंकि आजकल असली मेहनत से ज्यादा आसान है विरासत पहन लेना।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 3, 2026
व्यंग रचनाएं
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देवर्षि नारद इंद्र को बताते हैं कि मृत्युलोक में मूर्खता अब योग्यता, नीति और प्रमोशन का आधार बन चुकी है। बुद्धिमान अल्पसंख्यक हो चुके हैं और प्रश्न करना अपराध माना जाने लगा है। इस व्यंग्यात्मक संवाद में मूर्खता के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्वरूप का तीखा और हास्यपूर्ण चित्रण किया गया है।
Ram Kumar Joshi
Apr 2, 2026
व्यंग रचनाएं
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“ऊर्जा स्वयं न पाजिटिव होती है न नेगेटिव—वह तो मात्र साधन है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसे साधु साधे या ‘साहिब’ साधे।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 1, 2026
Important days
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अप्रैल फूल अब एक दिन का त्योहार नहीं रहा, बल्कि समाज का स्थायी चरित्र बन चुका है—जहाँ राजनीति, मीडिया और सोशल मीडिया मिलकर रोज़ाना जनता को नए-नए रूपों में मूर्ख बनाते हैं, और जनता इसे मनोरंजन समझकर स्वीकार भी कर लेती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 31, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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फ्री विल पूर्ण स्वतंत्रता नहीं, बल्कि दिशा चुनने की क्षमता है—जहाँ मनुष्य प्रकृति के प्रवाह से ऊपर उठने का साहस करता है।स्वतंत्र इच्छा वहीं जन्म लेती है, जहाँ मनुष्य अपने भीतर उठे विचारों को केवल देखना नहीं, बल्कि सजगता से चुनना सीखता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 31, 2026
हिंदी लेख
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आज के दौर में आदमी का मूल्य उसके चरित्र से नहीं, फाइल में लगी डिग्री से तय होता है। डिग्री ज्ञान का प्रमाण कम, सामाजिक प्रतिष्ठा का पासपोर्ट अधिक बन चुकी है—और बेरोज़गारी इस पासपोर्ट पर रोज़ वीज़ा रिजेक्ट कर रही है।