नाम में क्या रखा है? — बहुत कुछ रखा है

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 17, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“आजकल आपका नाम वो नहीं होता जो माता-पिता ने रखा था, बल्कि वो होता है जो किसी अज्ञात व्यक्ति ने अपने मोबाइल में सेव कर रखा है… और तभी आप डॉक्टर से सीधे ‘HD Wallpaper’ बन जाते हैं।”

बोनसाई की कला

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 16, 2026 हिंदी लेख 0

बोनसाई केवल बागवानी की कला नहीं है, यह समाज की एक गहरी रूपकात्मक सच्चाई भी है। कई लोग और संस्थाएँ हमें सींचते तो हैं, पर उतना ही बढ़ने देते हैं जितना उनके लिए सुविधाजनक हो। जैसे चाय के बागानों में एक संभावित वृक्ष को बार-बार काटकर पौधा बनाए रखा जाता है, वैसे ही जीवन के कई क्षेत्रों में प्रतिभाओं को सीमित रखने की अदृश्य व्यवस्था काम करती रहती है।

कदमोपाख्यान : देवसभा में कड़े क़दमों पर कशमकश 

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 16, 2026 व्यंग रचनाएं 0

मृत्युलोक की राजनीति में “कड़े कदम” उठाने की अद्भुत तकनीक विकसित हो चुकी है। हर संकट में घोषणा होती है कि कड़े कदम उठाए जाएंगे—और जनता आश्वस्त हो जाती है। जब इस तकनीक की चर्चा देवलोक पहुँची, तो इंद्रदेव ने नारद मुनि को इसकी तहकीकात के लिए भेजा। उनकी रिपोर्ट सुनकर देवसभा भी सोच में पड़ गई—कहीं यह तकनीक देवलोक को भी मृत्युलोक न बना दे।

संवेदना , में छिपी अपनी वेदना !

Prem Chand Dwitiya Mar 16, 2026 व्यंग रचनाएं 1

आज के सार्वजनिक जीवन में संवेदना भी एक सार्वजनिक प्रदर्शन बन गई है। किसी की पीड़ा कम हो या न हो, पर फोटो, पोस्ट और लाइक-शेयर की दुनिया में संवेदना का बाजार खूब गर्म है। यह व्यंग्य उसी विडंबना को पकड़ता है जहाँ असली वेदना से ज्यादा महत्व संवेदना की तस्वीरों को मिल जाता है।

कबीरा खड़ा  बाजार में –

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 14, 2026 People 0

कबीर एक नहीं, अनेक रूपों में हमारे सामने आते हैं—पाठ्यक्रमों में, लोकगीतों में, राजनीतिक विमर्शों में। पर असली कबीर वही है जो काशी का जुलाहा है, जिसकी भाषा में करघे की खनक है और प्रश्नों की धार। वह मंदिर और मस्जिद दोनों से एक ही सवाल पूछता है—राह कहाँ है?

पुष्पक विमान से पुष्प वर्षा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 14, 2026 व्यंग रचनाएं 0

शहर की टूटी सड़कों और बजबजाती नालियों के बीच जब नेताजी की छवि भी पैबंददार हो गई, तो समाधान आसमान से उतरा—हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा। फर्क बस इतना पड़ा कि फूल जनता पर कम और नालियों में ज़्यादा गिरे, मगर नेताजी की छवि पर चढ़ा नया प्लास्टर खूब चमक गया।

तंत्र का असली स्वरूप और तांत्रिक बाज़ार का भ्रम : युवाओं को कैसे भरमा रहा है नकली तंत्र

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 13, 2026 Lifestyle 1

तंत्र भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की एक गंभीर साधना-पद्धति रहा है, जिसका उद्देश्य चेतना का विस्तार और ऊर्जा का संतुलन था। लेकिन समय के साथ इसके नाम पर भय, चमत्कार और अंधविश्वास का एक पूरा बाज़ार खड़ा हो गया है। आज आवश्यकता है कि हम असली तंत्र और उसके नाम पर चल रहे भ्रम के बीच अंतर समझें।

एकात्म मानववाद : भारतीय चिंतन की समग्र विकास-दृष्टि

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 13, 2026 शोध लेख 0

एकात्म मानववाद भारतीय चिंतन की वह समन्वयवादी दृष्टि है जो मनुष्य को केवल आर्थिक इकाई नहीं बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा से बने समग्र अस्तित्व के रूप में देखती है। यह दर्शन व्यक्ति, समाज, संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास को समग्र रूप में समझने की प्रेरणा देता है।

राष्ट्रीय गधा पालन योजना

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 12, 2026 व्यंग रचनाएं 0

सरकार की पशुपालन योजना में गाय-भैंस को तो जगह मिल गई, पर गधे को अभी भी पहचान का इंतजार है। गधा गणना में घटती संख्या ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। इस व्यंग्य में गधा संरक्षण, पति पंजीकरण और पड़ोसी देशों की गधाग्राही अर्थव्यवस्था के बहाने समाज और व्यवस्था पर हल्का-फुल्का कटाक्ष किया गया है।

राजनीति में ‘काम कर दिया’ की संस्कृति : विरोध, तमाशा और लोकतंत्र की गिरती मर्यादा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 11, 2026 समसामयिकी 0

एआई समिट के बाद राहुल गांधी के बयान से उठे विवाद ने केवल एक राजनीतिक बहस को नहीं जन्म दिया, बल्कि यह भी उजागर किया कि भारतीय राजनीति में विरोध और व्यवधान के बीच की रेखा कितनी धुंधली होती जा रही है। क्या लोकतंत्र में असहमति अब प्रदर्शन और सुर्खियों का खेल बनती जा रही है?