भारत की बेटियाँ: एक राग, एक विजय — Women’s ICC Champions

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 3, 2025 India Story 0

“कप्तानों से बढ़कर, यह जीत उन सपनों की है जो साथ दौड़ते हैं—एक राग, एक भारत।” “जब विविध सुर मिलते हैं, जीत का आलाप अपने आप जन्म लेता है—भारत विश्वविजेता।” “साहस, संयम और संगति—इन्हीं तीन रंगों से तिरंगा ट्रॉफी छू लेता है।”

गोपाष्टमी : गो, गृह और गंगा की तरह पवित्र — हमारी सभ्यता का अदृश्य आधार

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 31, 2025 Culture 0

गोपाष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की जड़ों का उत्सव है — वह दिन जब हम यह स्मरण करते हैं कि हमारी संस्कृति, हमारी खेती, और हमारा जीवन — सब गो के उपकार पर टिका है। गोबर से लीपे आँगन, दूध से पोषित पीढ़ियाँ और बैल से चलती हल की रेखाएँ — यही तो भारत का असली तंत्र है।

छट पर्व –जहाँ अस्त हुए सूरज को भी पूजा जाता है

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 26, 2025 Culture 0

छठ पर्व अब बिहार की सीमाओं से निकलकर विश्वभर में भारतीय आस्था का प्रतीक बन चुका है। यह केवल सूर्य उपासना नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के संवाद का जीवंत पर्व है — जहाँ श्रम, श्रद्धा और संतुलन मिलकर जीवन के हर अंधकार को प्रकाश में बदल देते हैं। लोकल से ग्लोबल तक, छठ भारतीय संस्कृति की आत्मा को उजागर करता है।

घास भैरू महोत्सव — लोक आस्था का रहस्यमय उत्सव

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 25, 2025 Culture 0

भाईदूज के दिन बूंदी के गांव जादुई नगरी में बदल जाते हैं — जहां पत्थर तैरते हैं, ट्रैक्टर कांच पर खड़े होते हैं, और देवता बैलों की सवारी करते हैं। घास भैरू महोत्सव — आस्था, जादू और लोककला का अनोखा संगम।

उत्सवों का देश: स्मृति से पुनर्जागरण तक

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 24, 2025 Culture 0

“कभी ‘यंतु, नजिक, चियां-चुक’—स्वर्ग के केंद्र—कहलाने वाली धरती आज अपने ही लोक-उत्सव भूल रही है। देव उठान एकादशी हमें याद दिलाती है कि रोशनी बिजली से नहीं, स्मृति से जलती है।” “रंग पंचमी से सामा-चकेबा और इगास तक—सैकड़ों लोक-त्यौहार विलुप्ति की कगार पर हैं। समाधान सरल है: परिवार को फिर केंद्र बनाइए, कथा सुनाइए, आँगन में देव उकेरिए, और परंपरा को फिर से जी लीजिए।” “गोवर्धन की गोबर-आकृति, हरियाली तीज के झूले, लोहड़ी का अलाव—ये सब ‘इवेंट’ नहीं, समाज की धड़कन हैं। देव उठान की शुरुआत के साथ याद करें: अनुष्ठान का अर्थ ‘औचित्य’ है, ‘आडंबर’ नहीं।”

भाईदूज — तिलक की रेखा में स्नेह, उत्तरदायित्व और रोशनी

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 23, 2025 Culture 0

“भाईदूज सिर्फ़ माथे का तिलक नहीं, रिश्ते की आत्मा में बसे भरोसे का पुनर्स्मरण है।” “जब बहन तिलक लगाती है, वह केवल दीर्घायु नहीं मांगती—वह भाई की सजगता और संवेदना की प्रार्थना करती है।” “तिलक की लाल रेखा विश्वास की नीति बन जाती है—जहाँ असहमति भी आदर के साथ संभव होती है।” “भाईदूज का असली दीप वह है जो रिश्ते के अंधकार में भी एक-दूसरे को देखने की रोशनी देता है।”

अन्नकूट महाप्रसाद — स्वाद, परंपरा और साझेपन की कथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 22, 2025 Culture 0

दीवाली और गोवर्धन के बीच का दिन केवल त्योहार का अंतराल नहीं, बल्कि साझेपन की परंपरा का उत्सव है। पहले अन्नकूट में हर घर का स्वाद एक प्रसाद में घुलता था — अब प्लेटें बदल गईं, मसाले डिब्बाबंद हो गए, परंपरा जीवित है, बस आत्मा में ‘मॉडर्न टच’ आ गया है। स्वाद अब स्मृति में है — और स्मृति ही असली प्रसाद है।

गोवर्धन पूजा — धरती, धारण और धारणा का उत्सव

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 21, 2025 Important days 0

गोवर्धन लीला केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि मानव चेतना की यात्रा है—जहाँ कृष्ण भक्त के रक्षक, गुरु और प्रेमस्वरूप हैं। इंद्र का गर्व, ब्रजवासियों की श्रद्धा और गिरिराज का सहारा—ये सब मिलकर बताते हैं कि ईश्वर हमें संकट से नहीं, अहंकार से मुक्त करते हैं। यह कथा सामूहिक शरणागति, भक्ति की सरलता और धर्म के जीवंत दर्शन का उत्सव है—जहाँ पर्वत केवल पत्थर नहीं, बल्कि करुणा का प्रतीक बन जाता है।

नरक चतुर्दशी — रूप, ज्योति और आत्म-शुद्धि की यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 18, 2025 Important days 0

“नरक चतुर्दशी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भीतर के नरक से मुक्ति का पर्व है। यह मन की अंधकारमय प्रवृत्तियों से प्रकाशमय चेतना की ओर यात्रा का क्षण है — जहाँ स्नान शरीर का नहीं, आत्मा का होता है; और दीप केवल मिट्टी का नहीं, मन का।”

धनतेरस नहीं, आरोग्य दीपोत्सव — धन्वंतरि के अमृत का असली अर्थ

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 18, 2025 Important days 0

धनतेरस को केवल खरीददारी का पर्व नहीं, बल्कि आरोग्य दीपोत्सव के रूप में मनाने का संदेश देता यह आलेख बताता है कि धन्वंतरि देव स्वास्थ्य, संयम और आत्मज्ञान के प्रतीक हैं। सोने से अधिक मूल्यवान है तन–मन का स्वास्थ्य, और असली दीप वह है जो भीतर जलता है — स्वच्छता, संयम और संतुलन के रूप में। यही है धनतेरस का शाश्वत अर्थ।