हमें इंसान बने रहने दो | डॉक्टरों के जीवन पर भावपूर्ण गीत

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 22, 2026 Health And Hospitals 0

डॉक्टर्स डे विशेष गीत “हमें इंसान बने रहने दो” सफेद कोट के पीछे छिपे डॉक्टर के संघर्ष, संवेदना, त्याग और मानवीय भावनाओं को अभिव्यक्त करता है।

चुप हैं जनता… | एक राजनीतिक व्यंग्य गीत जो समाज से सवाल भी करता है और आईना भी दिखाता है

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 21, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

"चुप हैं जनता..." एक मौलिक हिंदी राजनीतिक व्यंग्य गीत है जो महँगाई, बेरोज़गारी, चुनावी वादों और आम आदमी की आवाज़ को लोकधुन, फोक-पॉप और प्रोटेस्ट रैप के माध्यम से प्रस्तुत करता है।

गुरु मेरे दीपक, गुरु दयाला: गुरु को समर्पित सूफी-भक्ति गीत

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 20, 2026 Culture 0

“गुरु मेरे दीपक, गुरु दयाला” गुरु के ज्ञान, करुणा और कृपा को समर्पित मौलिक सूफी-भक्ति गीत है। पढ़िए गीत की रचना-यात्रा और सुनिए इसका संगीतमय वीडियो।

पापा तुम्हारे बिना…: पिता के प्रेम, त्याग और आशीर्वाद को समर्पित भावपूर्ण गीत

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 19, 2026 Culture 0

“पापा तुम्हारे बिना…” उन सभी पिताओं को समर्पित एक भावपूर्ण हिंदी गीत है, जिन्होंने स्वयं धूप में चलकर अपने बच्चों के जीवन में सपनों, संस्कारों और साहस की रोशनी भरी।

मेवाड़ की लाज बचा जावाँ: महाराणा प्रताप, चेतक और हल्दीघाटी की अमर वीरगाथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 17, 2026 Culture 0

महाराणा प्रताप, चेतक और हल्दीघाटी के अमर बलिदान को समर्पित वीर-रस गीत “मेवाड़ की लाज बचा जावाँ” की कहानी और संपूर्ण गीत पढ़ें-सुनें।

जय जगन्नाथ – रथ पर सवार प्रभु आए

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 17, 2026 Culture 0

भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा पर आधारित यह मौलिक भक्ति गीत श्रद्धा, समानता और प्रेम का संदेश देता है। पढ़ें रथयात्रा की कथा और सुनें पूरा गीत।

पर्यावरण संरक्षण एवं सुधार पर केंद्रित हो विकास की हर नीति

Dr Shailesh Shukla May 8, 2026 Agriculture/environment 0

पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है? जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सतत विकास, जल संरक्षण, जंगल, ऊर्जा और भारत के भविष्य पर आधारित विस्तृत हिंदी लेख पढ़ें।

न्यायपालिका, आलोचना और लोकतंत्र : क्या न्यायालयों को आलोचना से भयभीत होना चाहिए?

Dr Shailesh Shukla May 6, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आलोचना सहने की क्षमता होती है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक अवश्य है, किंतु क्या वह आलोचना से ऊपर हो सकती है? यह लेख न्यायपालिका की गरिमा, अवमानना कानून, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन की गंभीर पड़ताल करता है।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: संघर्ष, चेतना और डिजिटल युग की नई दिशा

Dr Shailesh Shukla Apr 28, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

1826 के उदन्त मार्तण्ड से लेकर डिजिटल और AI युग तक हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा, संघर्ष, विकास और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण।