डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 27, 2025
India Story \बात अपने देश की
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यह साल किसी कैलेंडर की तरह नहीं बीता, बल्कि अधूरी डायरी की तरह—जहाँ स्याही कम और धड़कन ज़्यादा थी। घटनाएँ बदलीं, लेकिन उनसे ज़्यादा बदले हमारे डर, ग़ुस्सा और चुप्पियाँ।
यह साल हमें किसी नतीजे तक नहीं लाया, बल्कि सवालों की लंबी सूची सौंप गया—कि हम क्या सोचते हैं, कैसे सोचते हैं और कब चुप रहते हैं।
आतंक, युद्ध, आस्था, कॉमेडी, सोशल मीडिया—हर मोर्चे पर यह साल हमें भीतर तक झकझोरता रहा। इतिहास बनता रहा, और हम बदलते रहे।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 27, 2025
India Story \बात अपने देश की
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27 दिसंबर को ग़ालिब सिर्फ़ याद नहीं आते—वे हमारे भीतर बोल उठते हैं। उनकी शायरी “फेल्ट थॉट” है: जज़्बात की नर्मी और तर्क की रोशनी का दुर्लभ मेल।
ग़ालिब को पढ़ना मतलब अपनी उलझन, तन्हाई और हैरत के लिए सही लफ़्ज़ पा लेना—और फिर उन लफ़्ज़ों के साथ थोड़ा हल्का हो जाना।
आज के डिजिटल दौर में भी ग़ालिब उतने ही ज़रूरी हैं—क्योंकि वे हमें नफ़रत से कम, समझ से ज़्यादा जोड़ते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 23, 2025
India Story \बात अपने देश की
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अरावली की अहमियत उसकी ऊँचाई में नहीं, उसके काम में है। सवाल यह नहीं कि पहाड़ी कितनी ऊँची है, सवाल यह है कि वह हमें क्या बचा रही है।अरावली को लेकर बहस दरअसल विकास और संरक्षण के बीच उस संतुलन की तलाश है, जो अक्सर नीति में खो जाता है और प्रकृति में दिखाई देता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 15, 2025
Culture
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वंदे मातरम कोई साधारण गीत नहीं है—यह वह ध्वनि है जो कभी कोड़ों की मार के बीच भी गूंजती थी और आज बहसों के शोर में दबाई जा रही है। इसके 150 वर्ष हमें यह याद दिलाते हैं कि राष्ट्र केवल सीमाओं से नहीं, स्मृतियों से बनता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 5, 2025
Darshan Shastra Philosophy
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देवव्रत महेश रेखे ने सिर्फ 19 वर्ष की उम्र में शुक्ल यजुर्वेद के 2000 मंत्रों का दंडक्रम स्मृति से पारायण कर दिखाया। यह केवल धार्मिक चमत्कार नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की क्षमता, वैदिक स्मृति-विज्ञान और हमारी श्रुति-परंपरा की जीवंत प्रयोगशाला है। यह कथा बताती है कि जहाँ दुनिया किताबों पर निर्भर है, वहाँ भारत अब भी चेतना पर ज्ञान लिखता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 29, 2025
India Story \बात अपने देश की
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बेग़म अख़्तर—एक नाम जो सिर्फ़ संगीत नहीं, दर्द, रूह और नफ़ासत का दूसरा नाम है। फैज़ाबाद की एक हवेली से शुरू होकर लखनऊ की महफ़िलों तक पहुँची यह आवाज़ किसी उस्ताद की देन नहीं, बल्कि टूटे हुए बचपन और संघर्षों से पैदा हुई कशिश का चमत्कार थी। ठुमरी, दादरा और ग़ज़ल को उन्होंने ऐसी आत्मा दी कि वे सिर्फ़ गाने न रहकर अनुभव बन गए। शादी के बाद संगीत छिन गया तो depression घेर लिया, पर जब उन्होंने फिर गाना शुरू किया—वे बेग़म अख़्तर बन गईं। उनकी ग़ज़लें आज भी वही हलचल जगाती हैं—जैसे कोई भूली हुई याद अचानक सांस ले उठे।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 26, 2025
Blogs
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“सिनेमाघर कभी मनोरंजन का देवालय था, जहाँ चाय-कुल्फी की आवाजें, तंबाकू की पिचकारियाँ, आगे की सीटों की रुई निकालने की परंपरा और इंटरवल का महाभारत—सब मिलकर एक सामूहिक उत्सव बनाते थे। वह जमाना गया, जब फिल्में हमें हमारी रियलिटी से कुछ पल उड़ा ले जाती थीं।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 25, 2025
Foreign Affair
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युद्ध का इतिहास दरअसल मनुष्य नहीं, तकनीक की कहानी है। नरमार की भोथरी गदा से लेकर ड्रोन, AI, सैटेलाइट और हाइपरसोनिक मिसाइलों तक—हर दौर में विजेता वही बना जिसने दूर से, सस्ते में और सुरक्षित प्रहार करने की कला सीख ली। युद्धभूमि बदल चुकी है, हम अब भी पुराने सपनों में अटके हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 23, 2025
India Story \बात अपने देश की
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महाभारत सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि मानव-व्यवहार, नेतृत्व, रणनीति, कॉन्ट्रेक्ट-मैनेजमेंट, समय-निर्णय और टीम-डायनैमिक्स की सबसे पुरानी केस-स्टडी है। अर्जुन की जिज्ञासा, दुर्योधन का एटिट्यूड, युधिष्ठिर की गलतियाँ और कृष्ण की नेतृत्व-शैली, आज के किसी भी कॉर्पोरेट संगठन पर समान रूप से लागू होती हैं। महाभारत हमें सिखाती है कि प्रश्न पूछना बुद्धिमत्ता है, सही गेम चुनना स्ट्रेटेजी है, समय पर निर्णय लेना दक्षता है, और नेतृत्व का असली रूप प्रतिष्ठा नहीं, ज़मीन पर उतरकर सारथी बनना है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 11, 2025
Important days
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“वंदे मातरम् केवल दो शब्द नहीं, एक दीर्घ श्वास है जो इस उपमहाद्वीप की नसों में आज भी बहती है।
डेढ़ सदी बाद भी यह गीत हमें याद दिलाता है कि भारत केवल भौगोलिक रेखाओं का जोड़ नहीं, एक जीवित अनुभूति है।
यह गीत राजनीति से ऊपर उठकर नागरिक-धर्म का गान है — एक ऐसा धर्म जो मनुष्यता को श्रेष्ठ मानता है, और मातृभूमि को ‘भूमि’ से ‘मां’ बना देता है।”