नारी जीवन हिंदी कविता महादेव प्रेमी रचित

Mahadev Prashad Premi May 18, 2020 Poems 1

नारी जीवन’ कविता नारी के महत्व और समाज में उसके विशेष स्थान का बोध कराती है . “नारी जीवन” (कुण्डली6चरण ) नारी जीवन दायिनी,नारी से संसार,हर रिश्ते की जान,वो वो ही घर परिवार, वो ही घर परिवार,वही ये जग के नाते,नारी शक्ती रूप,प्रेम नारी से पाते, “प्रेमी” नर वुनियाद बनी ,नारी के ही तन,नारी की […]

भारत की पलायन करती अर्थव्यबस्था पर कविता

डॉ मुकेश 'असीमित' May 18, 2020 Poems 0

गर लौट सका तो जरूर लौटूंगा, तेरा शहर बसाने को।पर आज मत रोको मुझको, बस मुझे अब जाने दो।।मैं खुद जलता था तेरे कारखाने की भट्टियां जलाने को,मैं तपता था धूप में तेरी अट्टालिकायें बनाने को।मैंने अंधेरे में खुद को रखा, तेरा चिराग जलाने को।मैंने हर जुल्म सहे भारत को आत्मनिर्भर बनाने को।मैं टूट गया […]

“मिटा कभी कोई ” हिंदी कविता महादेब “प्रेमी “द्वारा रचित

Mahadev Prashad Premi May 17, 2020 Poems 0

मेरी कविता "मिटा कभी कोई" व्यक्ति के सहस और विवेक की बात करती है की कैसे एक व्यक्ति सहस और विवेक से साधन हीन होते हुए भी कर्मशील बन जाता है और जीवन में सफल हो सकता है.

व्यग्र पाण्डेजी की प्रथम प्रकाशित पुस्तक ” कौन कहता है… ” पर रचित कविता

Maneesh Agrawal Mana May 15, 2020 Poems 0

गंगापुर सिटी का साहित्यकार की दृष्टि से सबका जाना-पहिचाना नाम है व्यग्र पाण्डे । आपके अबतक तीन काव्य-संग्रह किताबगंज प्रकाशन से प्रकाशित हो चुके हैं । ये पुस्तक (कौन कहता है…) इनकी प्रथम पुस्तक है । इसमें गीत ,गजल, दोहे, तुकान्त व अतुकांत कविताएँ साथ ही कुछ लघुकथाएं भी सम्मिलित की गई है । इसका […]

“भ्रष्टाचार” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 12, 2020 Poems 0

कविता शीर्षक भ्रष्टाचार आज इस व्यापक महामारी जो की कोरोना रुपी महामारी से भी भयानक इस संसार में व्याप्त है,को इंगित करती है. “भ्रष्टाचार”कुण्डली 8चरण भ्रष्टाचारी माफिया,गुण्डे तष्कर चोर,नाम राष्ट्र निर्माण,के मचा रहे वो शोर, मचा रहे वो शोर,राष्ट्र निर्माण को लेकर,कर जन्ता गुमराह,चले ईमान बेचकर, आफिस या स्टेशन,रेट सव जगह फिक्स है,रिस्वत ले ईमान,फिर […]

“काम क्रोध मद लोभ” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 11, 2020 Poems 0

यह कविता जिसका शीर्षक है” काम क्रोध मद लोभ ” आज के मनुष्य की इन चार विनाशकारी प्रब्रतियो में लिप्त होने की व्यथा व्यक्त करती है ” कैसे मानुष इन दुर्व्रतियो में अध्हें होकर अपना समूल नष्ट करने पर तुला हुआ है “काम क्रोध मद लोभ”8चरन, काम क्रोध मद लोभ सब,देते कष्ट अपार,फिर भी इस […]

“ज्यों जल” हिंदी कविता by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 10, 2020 Poems 2

नाव में बढ़ा जल और घर में बढे धन दौलत की एक ही दशा होती है. जैसे नाव में बढ़ा जल अगर अंजलि भर भर बहार को निकला नहीं गया तो वह नाव को डूबा देगा उसी प्रकार घर में बढे धन को अगर सदुपयोग नहीं किया तो बह विनाश की और ले जाता है ||