व्यग्र पाण्डेजी की प्रथम प्रकाशित पुस्तक ” कौन कहता है… ” पर रचित कविता

Maneesh Agrawal Mana May 15, 2020 Poems 0

गंगापुर सिटी का साहित्यकार की दृष्टि से सबका जाना-पहिचाना नाम है व्यग्र पाण्डे । आपके अबतक तीन काव्य-संग्रह किताबगंज प्रकाशन से प्रकाशित हो चुके हैं । ये पुस्तक (कौन कहता है…) इनकी प्रथम पुस्तक है । इसमें गीत ,गजल, दोहे, तुकान्त व अतुकांत कविताएँ साथ ही कुछ लघुकथाएं भी सम्मिलित की गई है । इसका […]

“भ्रष्टाचार” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 12, 2020 Poems 0

कविता शीर्षक भ्रष्टाचार आज इस व्यापक महामारी जो की कोरोना रुपी महामारी से भी भयानक इस संसार में व्याप्त है,को इंगित करती है. “भ्रष्टाचार”कुण्डली 8चरण भ्रष्टाचारी माफिया,गुण्डे तष्कर चोर,नाम राष्ट्र निर्माण,के मचा रहे वो शोर, मचा रहे वो शोर,राष्ट्र निर्माण को लेकर,कर जन्ता गुमराह,चले ईमान बेचकर, आफिस या स्टेशन,रेट सव जगह फिक्स है,रिस्वत ले ईमान,फिर […]

“काम क्रोध मद लोभ” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 11, 2020 Poems 0

यह कविता जिसका शीर्षक है” काम क्रोध मद लोभ ” आज के मनुष्य की इन चार विनाशकारी प्रब्रतियो में लिप्त होने की व्यथा व्यक्त करती है ” कैसे मानुष इन दुर्व्रतियो में अध्हें होकर अपना समूल नष्ट करने पर तुला हुआ है “काम क्रोध मद लोभ”8चरन, काम क्रोध मद लोभ सब,देते कष्ट अपार,फिर भी इस […]

“ज्यों जल” हिंदी कविता by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 10, 2020 Poems 2

नाव में बढ़ा जल और घर में बढे धन दौलत की एक ही दशा होती है. जैसे नाव में बढ़ा जल अगर अंजलि भर भर बहार को निकला नहीं गया तो वह नाव को डूबा देगा उसी प्रकार घर में बढे धन को अगर सदुपयोग नहीं किया तो बह विनाश की और ले जाता है ||

साईं हिंदी कविता by Mahadev “premi”

Mahadev Prashad Premi May 9, 2020 Poems 0

आज मेरी कविता साईं इस संसार के छल कपट मोह माया के जाल में फंसे हुए इंसान की तरफ इंगित करती है. की कैसे इस संसार के मोहजाल में अपनी स्वार्थ सिद्धि में इंसान अपने सही मूल्यों को भूलता जा रहा है “सांई”साईं इस संसार में ,मतलब के सब लोग,स्वारथ सिद्धी हो गयीं,भूल गये संयोग, […]

“दौलत” Doulat Hindi Poem by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 8, 2020 Poems 0

आज की मेरी रचना दौलत रुपी मिथ्या भुलाबे में जो मानव जगत अपनी बहुमूल्य निधि अपना परिवार और मानव धर्म को भूल रहा है. उस दौलत के मिथ्या और छन भंगुर होने का अहसास कराता है .यहाँ दौलत शीर्षक से कविता कुंदिली विधा में रचित है जिसके ६ चरण है,सामान्यतया मेरी जितनी भी रचना है […]

“तिनका ” हिंदी कविता by Mahadev premi

Mahadev Prashad Premi May 7, 2020 Poems 0

आज की मेरी कविता उन दुराभावो को दूर करने के लिए प्रेरित है जिस के चलते हम अपने से तुच्छ या नीचे ओहदे बाले व्यक्तियों कोइ सैदेव उलाहना या निंदा करते है. किसी भी व्यक्ति विशेष को उसके पद या हैसियत के हिसाब से छोटा या नीच नहीं समझना चाहिए,परिस्थितिया आपके प्रतिकूल होने पर ही […]