“आरक्षण” हिंदी कविता महादेव प्रेमी रचित
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“केशरिया परिधान”कुण्डली 6चरण केशरिया परिधान लखि,हर विपक्षी वेहाल,राज नीति कैसे चले,लेय वाल से खाल, लेय वाल से खाल,देख इस को पहिचानो,दिखे देश का भक्त,इसे आतंकी मानो, “प्रेमी”धारा लगा,कोई कैसे भी तरियां,चाहे हो निर्दोष,लाल कर दो केशरिया। रचियता- महादेव “प्रेमी” अगर आप पहेलिय पढने में या बूझने में रूचि रखते है तो मेरे द्वारा संकलित पहेली […]
“हरित वाटिका”कुण्डली 6चरण हरित वाटिका में युगल,कर रहे मेल मिलाप,होट परस्पर मिल रहे,कर रहे वार्तालाप, कर रहे वार्तालाप,मिली इनको आजादी,हिन्दु संस्क्रति भूल,बने पश्चिम के वादी, “प्रेमी”ये ही हाल कि,वालक और वालिका,नित्य देख मधुपर्व,घूमले हरित वाटिका। रचियता -महदेव “प्रेमी “ आपको हमारी कविताएं कैसी लग रही है,कृपया अपने विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में जरूर […]
“चोरी”कुण्डली 6चरण चोरी यद्यपि पाप है,चोरी है अपराध,फिर भी चोरी कीजिये,अधिकारी को साध, अधिकारी को साध,चलेगी रिस्वत खोरी,विजलि पानी टैक्स,कीजिये जमकर चोरी, “प्रेमी”कह ये काम,भरे नोटों से बोरी,बना लीजिये संघ,साथ मिल करिये चोरी। रचियता- महादेव प्रेमी CANVAS AND PAPER PRINTS OF HANDMADE PAINTINGSUltra-premium museum quality with outstanding details
मेरी कविता शीर्षक नीड छोड़ उन प्रवासी मजदूरों को समर्पित जो अपने पेट पालने खतिर अपना घरबार छोड़ कर दूर देश में अन्य राज्यों में या बाहर विदेश में मजबूरी में अपना जीवन यापन कर रहे है. “नीड़ छोड”कुण्डली 8चरण नीड़ छोड़ पंछी उड़ा,सात समुन्दर पार,दो रोटी की फिक्र में,जीवन रहा गुजार, जीवन रहा गुजार,फक्र […]
“मां मन्दिर का दीप”कुण्डली 8चरण मां मन्दिर का दीप हैं, मां पूजा का थाल,जिसे दुआ मिलती रहे,सदा रहे खुशिहाल, सदा रहे खुशहाल, नहीं कोई दुविधा आती,राहू केतू शनी,आदि की ग्रह टल जाती, मां जगह कोइ और,नहीं करता भरपाती,मां का आशीर्वाद,डुबी नौका तर जाती, “प्रेमी”नेक नसीव,तो मां को रखो समीप,मां की सेवा करो ,है मां मन्दिर […]
“हाथ पैर यदि पास”कुण्डली 8चरण हाथ पैर यदि पास हों,मांग कभी ना भीख,साहस पंखों में जगा,नभ में उड़ना सीख, उड़ना नभ में सीख,कभी झोली न पसारो,कर्म कोइ भी करो,ताहि सो होय गुजारो, हाथ पैर यदि साथ,देय तो मांग न जइहैं,मांगन मरण समान, तु जीते जी नहिं मरिहैं, “प्रेमी”मांग न कभी,भी जब तक तन की आस,काम […]
“अपनी राह”कुण्डली 8चरण अपनी राह स्वयम् चुनो,तव पाओगे मान,नदियां सागर में मिले,खो अपनी पहचान, खो अपनी पहचान,नदी सागर में मिलती,मीठे जल को छोड़,सभी सागर में ढलती, जव तक अपनी राह,चली पूज्यनिय बनी थी,प्रथक नदी के नाम,साथ सम्मान वही थी, “प्रेमी”मार्ग नेक ,तो सफल होयगी चाह,,सुयश चाहत हो यदि,मत छोडो अपनी राह। रचियता महादेव प्रेमी
“आलोचना प्रशंसा”कुण्डली 8 चरण आलोचना अरु प्रशंसा,एक दूजे विपरीत,करते सव ही है सदा,यह दुनियां की रीत, यह दुनियां की रीत,न रीझ प्रशंसा सुनकर,निंदा कोई करै,कभी नहिं बोल उवल कर, स्तुती करने वालों, को मौका ना मिलेगा,निंदा करने चले,उ का सर ज़मीं झुकेगा, “प्रेमी” जग की रीत,देख मैंने की मन्शा,रीझो उवलो नांहि ,कि सुन आलोच प्रशंसा। […]
“नित सुवह से शाम”कुण्डली 8चरण नित सुवह से श्याम तक,उछल कूद हुडदंग,योवन तक धूमिल हुए,बचपन के सव रंग, बचपन के रंग भूल,राह कुछ ऐसी पकड़ी,तीन चीज रहि याद,नमक तेलहि अरु लकडी, गिल्ली डंडा और,कबड्डी दौड रेल में,चोर सिपाही खो कि,सु मस्ती बनी खेल में, “प्रेमी”योवन साथ,हुए सव पारिवारिक काम,धूमिल हुआ बचपन,खेला नित सुवह से शाम। […]