Mahadev Prashad Premi
May 9, 2020
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आज मेरी कविता साईं इस संसार के छल कपट मोह माया के जाल में फंसे हुए इंसान की तरफ इंगित करती है. की कैसे इस संसार के मोहजाल में अपनी स्वार्थ सिद्धि में इंसान अपने सही मूल्यों को भूलता जा रहा है “सांई”साईं इस संसार में ,मतलब के सब लोग,स्वारथ सिद्धी हो गयीं,भूल गये संयोग, […]
Mahadev Prashad Premi
May 8, 2020
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आज की मेरी रचना दौलत रुपी मिथ्या भुलाबे में जो मानव जगत अपनी बहुमूल्य निधि अपना परिवार और मानव धर्म को भूल रहा है. उस दौलत के मिथ्या और छन भंगुर होने का अहसास कराता है .यहाँ दौलत शीर्षक से कविता कुंदिली विधा में रचित है जिसके ६ चरण है,सामान्यतया मेरी जितनी भी रचना है […]
Mahadev Prashad Premi
May 7, 2020
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आज की मेरी कविता उन दुराभावो को दूर करने के लिए प्रेरित है जिस के चलते हम अपने से तुच्छ या नीचे ओहदे बाले व्यक्तियों कोइ सैदेव उलाहना या निंदा करते है. किसी भी व्यक्ति विशेष को उसके पद या हैसियत के हिसाब से छोटा या नीच नहीं समझना चाहिए,परिस्थितिया आपके प्रतिकूल होने पर ही […]
Mahadev Prashad Premi
May 5, 2020
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कलयुग की उल्टी लीला से सभी सामना कर रहे है. कलयुग के रूप में जो उल्टी गंगा बह रही है उसका सटीक वर्णन करती हुई यह कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है “कलयुग” कलयुग झूठ अधार है,कलयुग बेईमान,कपट, द्वेष ,पाखंड सब, हैं अवगुण की खान, है अवगुण की खान ,कि भोगी योगी बन गये,चोर लुटेरे साधु […]
Mahadev Prashad Premi
May 5, 2020
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Duniyadaari (दुनियादारी ) kundili रचना इस दिनिया के मायाजाल को देख कर बनायीं है ,कैसे मनुष्य इस मायाजाल में फंसकर अपनी साड़ी जिंदगी व्यर्थ क्र देता है और जो उसका परम उद्देश्य इस जीवन में अपने आपको पहचानने का है उसको भूल गया है.
Mahadev Prashad Premi
May 4, 2020
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जैसा की आप सभी जानते है भारतीय पाक कला विज्ञान में पुरातन काल से ही चटनी और अचार का विशेष महत्व है. हमारे नित प्रतिदिन के खानपान में इसका समावेश रहता है. यह न केवल एक प्रकार से खाने का मेनू बढाने के लिए है बल्कि इसका एक वैज्ञानिक कारन है. यहाँ भारत का परम्परिक सूप है जो भूख बढाता है तथा पाचन शक्ति की व्रद्धि करता है. आज की मेरी कविता इसी पाक विशेष "चटनी औ अचार " को समर्पित है.
Sanjaya Jain
May 3, 2020
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Here is a beautiful poem composed by Dr. Sanjay Jain. This dialogue of your own conscience will really overwhelm you.
Vyagra Pandey
May 3, 2020
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आज कोरोना संकट से जूझ रहे विश्व पर मेरी ये विशेष रचना “कोरोना की दीक्षा ” प्रस्तुत कर रहा हु. कोरोना रुपी इस बह्यानक महालाल में हर मनुष्य अपने आप को मनुष्य बनाए रखे यह इस कोरोना रुपी संकट से उबरने के लिए नितांत आवश्यक है कोरोना की दीक्षा है … “”””””””””” “””””””””””””” तू तेरे […]
Mahadev Prashad Premi
May 3, 2020
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आज की मेरी कविता लाठी को समर्पित. जी हा लाठी, हमारे देश के पुरातन काल का सबसे ज्यादा प्रचलित हथियार है जो बहुद्देशीय है और हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है. आइये जानिये कैसे लाठी का एक महत्वपूर्ण योगदान हमारी दीनिक जीवन चर्या में है इस कविता के माध्यम से “लाठी” लाठी हथियन देखकर,खड़े […]
Mahadev Prashad Premi
May 2, 2020
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आज की मेरी कविता पतंग और पतंग बाजी को समर्पित. हमारे देश में पतंगबाजी खेल एवं मनोरंजन की ऐसी विधा है जो देश के हर कोने में पायी जाती है. लोग त्यौहार या किसी खुशी के अवसर पर परिवार के साथ इस पतंबाजी का शौक पूरा करते है. देश में कई जगह पतंग महोत्सव भी […]