मंचीय कवि सम्मेलन की मच मच
आज का मंचीय कवि सम्मेलन कविता का नहीं, प्रदर्शन का उत्सव बन गया है—जहाँ कविता घूंघट में सिमटी रहती है और चुटकुले, अभिनय और जुगाड़ का नाच चलता रहता है।
India Ki Baat
आज का मंचीय कवि सम्मेलन कविता का नहीं, प्रदर्शन का उत्सव बन गया है—जहाँ कविता घूंघट में सिमटी रहती है और चुटकुले, अभिनय और जुगाड़ का नाच चलता रहता है।
आज का बच्चा कहानियों से नहीं, एल्गोरिद्म से सीख रहा है। क्या हम सुविधा के नाम पर उसके भावनात्मक विकास से समझौता कर रहे हैं?
“भाइयो-बहनो, आज अगर हम रपट जाएँ… तो हमें न उठइयो।” लोकतंत्र के इस विचित्र महोत्सव में हर वर्ग अपनी-अपनी शैली में फिसल रहा है—कोई वादों पर, कोई सच्चाई पर, कोई सिद्धांत पर… और आम आदमी, वह तो रोज़ की आदत से फिसल ही रहा है।
कृत्रिम मेधा शिक्षा को तेज़, व्यक्तिगत और सुलभ बना रही है, लेकिन इसके साथ ही रचनात्मकता, नैतिकता और समानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। इस बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका समाप्त नहीं, बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है—एक मार्गदर्शक और संवेदनशील निर्माता के रूप में।
नक्षत्र और राशि एक ही चीज़ नहीं—वे आकाश को देखने की दो अलग खिड़कियाँ हैं। नक्षत्र चंद्र की गति से बने हैं, राशि सूर्य के चक्र से। पंचांग पहले गति को समझता है, फिर इकाई बनाता है—यही उसका विज्ञान है। जब हम समझते हैं कि समय के दो मान साथ चल रहे हैं, तब त्योहारों की बदलती तारीख़ें समझ में आने लगती हैं।
कुरुक्षेत्र से लेकर विश्व युद्धों तक मानव इतिहास संघर्षों से भरा रहा है, जहाँ विजय और पराजय के बीच अंततः पीड़ा ही शेष रही। यह कविता आधुनिक युद्धोन्माद के बीच प्रेम को एक ऐसी “पैट्रियाड मिसाइल” के रूप में खोजती है, जो नफरत की “स्कड मिसाइलों” को जन्म लेने से पहले ही निष्क्रिय कर सके।
उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। 2000 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृति, हजारों इकाइयों को सहायता और उच्च स्ट्राइक रेट के साथ यह मॉडल न केवल आर्थिक विकास बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभरा है।
आनंदमठ केवल एक कथा नहीं, एक चेतना है—जहाँ भूख विद्रोह को जन्म देती है, भक्ति शक्ति में बदल जाती है और मातृभूमि एक भाव नहीं, एक पुकार बन जाती है। बंकिमचंद्र का यह उपन्यास हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र केवल मानचित्र नहीं, त्याग और तपस्या से निर्मित एक जीवित अनुभव है।
क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है? आर्थिक प्रगति, निवेश, अवसंरचना और प्रशासनिक सुधारों का यह समन्वित मॉडल विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है।
गणगौर केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि स्त्री-जीवन की भावनाओं, आशाओं और सौंदर्य का उत्सव है। गाँव की उन गलियों में, जहाँ गीतों के साथ रिश्ते भी गूंजते थे, यह पर्व सचमुच “जीया” जाता था—न कि केवल निभाया जाता था।