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श्री नृसिंह स्तुति

"Abstract ink sketch of Lord Narasimha seated on a lotus in meditative yet fierce posture, half-lion half-man face with open fangs, four arms in divine gestures, radiating both terror and compassion."

श्री नृसिंह स्तुति

वन्दे नरसिंहं भक्तजन-प्रह्लाद-पालक।
वन्दे हिरण्यकशिपोः वक्षो-विदारण-विलासक॥

वन्दे उग्ररूपं दिव्य-भयानक-तेजम्।
वन्दे करुणाकरं भक्तवत्सल-भुजम्॥

वन्दे नख-शृङ्ग-धारिणं दैत्यकाय-भञ्जनं।
वन्दे लोकपावनं हृदयस्थ-वन्दनं॥

वन्दे नृसिंहमादिं सर्वशरणागत-पालं।
वन्दे दुःखहरं दीनदयालु-कृपालं॥

वन्दे अन्तर्यामि सर्वत्र विहारिणं।
वन्दे बहिर्नृसिंहं हृदयस्थाचारिणं॥

वन्दे प्रह्लाद-आनन्ददं कृपासुधाकरं।
वन्दे विश्वनाथं लोकहितार्थ सदा स्थिरं॥

वन्दे उग्रभयानकं भक्तजनाभयदातारं।
वन्दे दैत्य-दलनं विश्वविख्यात-नातारं॥

वन्दे भवसिन्धु-नौकं दुःखहरं तारकं।
वन्दे प्रलय-काल-मृत्युभय-नाशकं॥

वन्दे त्रैलोक्यनाथं केशवावतारं।
वन्दे नरहरिरूपं जय जगदीश हरे॥

रचनाकार-श्री हरी भक्त

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