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जब मुझे गायन का शौक चढ़ा -हास्य व्यंग रचना

जब गायन का भूत सिर पर सवार हुआ, तो लगा कि शायद मैं भी किसी रॉकस्टार की तरह मंच पर छा जाऊंगा

जब गायन का भूत सिर पर सवार हुआ, तो लगा कि शायद मैं भी किसी रॉकस्टार की तरह मंच पर छा जाऊंगा

यूँ तो जिंदगी में शौक पालना जैसे मेरा शगल बन गया है, हर नए शौक को अपनाया है तो एक जूनून के साथ और जब छोड़ा है तो ऐसे छोड़ा है जैसे कभी उस से कोई वास्ता ही नहीं था ,जैसे नेताजी अपने पाले हुए गुंडे को पुलिस द्वारा पकड़ने पर पहचान ने से इनकार कर देते है ,बस इसी तरह से पल्ला झाड़ता हूँ ,पीछे मुड कर देखता ही नहीं । गनीमत ये है की जब भी कोई नया शौक पकड़ता हु, उसे अगर साल भर भी पकडे रखा तो ये शौक की खुशनसीबी होगी वरना अपन तो ६ महीने में ही तलाक तलाक  तलाक कह कर विदा कर देते है | कई बार शौक खुद ही मुझ से गुहार करता नजर आता है ,भगवान् के लिए मुझे छोड़ दो , बहुत हो गया, और बर्दाश्त नहीं कर सकता!

देखो में कोई उलटे सीधे शौकों की बात नहीं कर रहा ,में ठहरा शहर का सबसे गरीब डॉक्टर ! भाई चाहकर भी ऐसा कोई रईसी शौक पाल नहीं सकता । वैसे भी कॉलेज टाइम से ही मेरी मुफलिसी और तंगहाली भरी जेब ने मुझे कभी किसी रंगीन संगति का हिस्सा बनने नहीं दिया।

लेकिन हाँ, बाकी सभी हॉबी अमूमन मैंने ट्राई की है। कुछ शौक हैं जैसे कि एक शौक जिसे आप पढ़ रहे हैं, ये अभी साल भर से मुझे चिपका है। इसके अलावा फोटोग्राफी का शौक, एक ऐसा शौक था जो मेरा काफी लंबे समय तक चला, लगभग 4 साल। अब थोड़ा कम हो गया है । इस शौक का जूनून जब था तो इस हद तक था की मेरे सोचने,खाने सोने सभी व्यबहार में ये रच बस गया,लाखों के फोटोग्राफी गियर खरीद लिए, धीरे धीरे शौक का जोश ठंडा पड़ने लगा,अब गिअरों में जंग नहीं लगे इसलिए कभी कभार इन्हें निकाल कर थोडा बहुत खचर खचर कर लेता हु.

लेकिन आज मैं जिस शौक की बात कर रहा हूँ वो है गायन का। जी हाँ, अजीब लगा ना सुनने !में लेकिन हमने ये शौक  भी आजमाया। शौक क्या लगा, गलती से एक दिन स्टार मेकर डाउनलोड हो गया। कुछ मेरे सहकर्मी जो कि स्टार मेकर  पर स्टार की तरह चमक रहे थे उन्हें देख कर हमें भी लगा कि हमें भी स्टार बनना चाहिए, तो इसे डाउनलोड कर लिया। अब तो गाने की धुन सवार हो गई। हमारी हसरत भी थी की बिल्कुल बॉलीवुड फिल्म के उस क्लाइमेक्स वाले सीन की तरह, जहां हीरो माइक पकड़े गाना गाता है और सब तालियां बजाते हैं,हीरोइन  हीरो का गाना सुनकर दौड़ी चली आती है  ,कुछ हम भी ऐसा ही करें । हमारे कॉलेज में भी कुछ गायकी के कीड़े थे जो स्टेज पर रेंगते थे  ,कुछ तो उनके दिखाए जाने वाले लटके झटके   और  जलवे की जलन ,और कुछ उन पर जिस प्रकार से लडकियां मरती थी  ,ये सब देखना जो वैसे तो हमें फूटी आँख भी नहीं सुहाता था, लेकिन  ये लडकियां मारने का शौक कॉलेज टाइम से ही चिपक गया था, कॉलेज में तो कुछ झंडा गाड नहीं पाए, क्यों की जब भी झंडा गाड़ने की कोशिश करते ,हमारे बेच की ही लडकियां ताने मारती,अरे मुकेश तुम भी ?,इतने पढ़ाकू हो,क्यों ये फ़ालतू के शौकों में अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हो ,और हम मन मसोस कर रह जाते.

singing rock star college life

अब कॉलेज की बात चली है तो लगे हाथों एक शौक जो हमने कॉलेज टाइम में पाला था, कुछ उसके बारे में भी बता दें – हमें म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट प्ले करने की धुन भी सवार हुई । कॉलेज टाइम में लड़कियों को लड़कों के इन दो ही शौक में दिलचस्पी थी , या तो आपको ज्योतिष विद्या आती हो, या फिर आपको गिटार बजाना। ज्योतीष विद्या के जानकार जो थे उनको में देखता था , दिन भर हमारे बेच की लड़कियों के हाथ थामे उनके हाथ की उल्टी सीधी लाइनों के उलटे सीधे भाग्यफल बताकर लाइन मारते रहते थे , सच में बड़ी कुढन होती थी ,जल कर कोयला हो जाते थे .सोचते थे ,काश हमारी हाथ में भी किसी सुकुमारी का हाथ हो !

अब दुसरे शौक की बात तो ओर भी निराली , हम देखते थे, कॉलेज के कल्चरल फेस्टिवल में ये तथाकथित नवोदित रॉक स्टार काला चश्मा पहने  अपने गिटार को गर्दन में टाँगे जिस प्रकार से स्टेज पर आते थे, मायक को हाथ से पकड़ कर ऐसे घुमाते थे कि कॉलेज की लड़कियां इन पर मरती थीं। लडकियां दोनों हाथ उठाकर चिल्ल पों करती थी और हम पीछे बैठे मेडिकल की अनोपचारिक मात्रभाषा में इन्हें गरियाते थे | एक बार हमें भी चस्का लगा कि दो चार लड़कियों को हम भी मारें, इसलिए जयपुर के प्रसिद्ध भट्ट घराने में गिटार सीखने पहुँच गए । देखा वहाँ हमारे ही कॉलेज के 20 लड़के पहले से ही उसी काम में जुटे थे, भट्ट जी को भी पता था, उन्होंने इन संगीत प्रेमियों के लिए एक बैच अलग ही कर रखा था, 1 महीने में गिटार सिखाने का कोर्स इनके लिये रखा था | फीस एडवांस लेते थे क्यूँ कि उनमें से 80 प्रतिशत लड़के तो 4 दिन बाद ही छोड़ कर चले जाते, लेकिन भट्ट जी उनको एक गाना जरूर सिखा देते थे , गाना था, ‘अजीब दास्तान है ये’। ये लोग चार दिन आते, 5 वें दिन गिटार खरीद लेते, पूरे हॉस्टल में गिटार की धुन और ये ही गाना ‘अजीब दास्तान है ये’ की दास्तान सुनाए देती। वहाँ हमने भी क्लास अटेंड की और औरों की तरह 3 क्लास में ही धराशायी हो गए। गिटार खरीदने को पैसे नहीं थे, रूम पार्टनर को पटाया ,उस से गिटार खरीदवाया और उसके तारों को साल भर झंझनाते रहे लेकिन साल भर भी ‘अजीब दास्तान गाना ,अजीब सी आवाज के साथ बजता रहा । हार थक के हमने रॉक स्टार बनने का सपना दफन के दिया ।

गायन का तो हमने कभी सोचा ही नहीं था, क्योंकि कभी किसी ने बताया ही नहीं कि मैं गा सकता हूँ, लेकिन स्टार मेकर ने अहले ही दिन हमें भरोसा दिलाया यस, यू कैन । और हम उस भरोसे से उत्साहित होकर स्टारमेकर पर गाना गाने लगे,कई कम्युनिटी जॉइन कर ली , मुझे स्टार मेकर पर गाने के अलावा सारे काम आते थे,मसलन कमुनिटी बनाना,दूसरों के गानों पर अहा वैरी नाईस कमेंट करना, उनके अधूरे डुएट को पूरा करना आदि आदि !

धीरे धीरे हम डुएट भी गाने लगे, विडियो सोंग भी आजमाने लगे , हमारे गानों पर भी वैरी नाईस के कमेंट आने लगे,लेकिन ज्यादातर उन्ही के थे जिनके अधूरे गानों को हमने डुएट गाकर पूरा किया , हमको लगा की अब हम किशोर साहब की कमी पूरी करने से बस कुछ ही कदम दूर है | जो पहले ही गायकी के धुरंधर थे उनसे गुरु ज्ञान लेने लगे , गाते गाते गला रुँध जाता था तो गला साफ करने के लिए काली मिर्च चबाने लगे, नमक के गरारे करने लगे, । फिर इच्छा हुई कि गायन की शास्त्र विधी में पारंगत होना चाहिए तो एक सिंगिंग टीचर हायर किया, कुछ गायन की सेलेब्रिटी के सब्सक्रिप्शन ले लिए ,

शास्त्रीय गायक के टीचर ने हमें पहली बार सारे गामा सिखाया , तान ,सुर, ताल हमें सिखाने लगे , हमें एक बार तो अचम्भा हुआ की स्टार मेकर ने तो कभी बताया ही नहीं की गाने के लिए ये सब झमेला झेलना पड़ता है ,फिर भी अभी हमारी आशा नहीं टूटी थी , सुबह सुबह पियानो लेकर बैठ जाते और तान छेड़ते, लेकिन कमरा बंद रखते ताकि हमारी प्रतिभा किसी को पता नहीं लगे ,फ़ालतू में नजर लग जायेगी , वैसे भी घर में किसी को भी मेरा ये शौक पसंद नहीं था ।

जैसे जैसे मेरे सुर और तान की फटे बांस की सी आवाज पड़ोसियों के कानों में पड़ने लगी , आस-पास के पड़ोसियों को भी अहसास हो गया कि कुछ तूफानी हो रहा है । मेरी बालकनी से निकलती सुरों की धाराएँ जब उनके घरों में प्रवेश करतीं, तो मानो हवा ने चीखे निकालनी शुरू कर दी हो । एक दिन तो हद ही हो गई, जब एक पड़ोसी ने खिड़की खोलकर कहा, “भाईसाहब, आपका गाना सुनकर तो हमारी बिल्ली भी गाना शुरू कर देती है। कृपया करके कुछ तो रहम करें!”

वैसे घरवालों को तो फोटोग्राफी के शौक भी पसंद नहीं था लेकिन उसके लिए तो हम सुबह सुबह चुपचाप घर से निकल लेते थे , किसी को पता ही नहीं चलता लेकिन यहाँ तान छेड़ने का मतलब उन्हें मुर्गे की बांग सा लगता था। और उनकी सुबह सुबह की नींद में ये खलल, पूरा घर परेशान हो गया ,लेकिन सभी को पता था की जल्दी ही मेरे ऊपर से ये भूत उतरने वाला है ,इसलिए उस घड़ी का इंतज़ार करते हुए मेरे जूनून के तूफ़ान को झेलते रहे | स्थिति ये हुई कि मेरा गाना सुनकर मेरे दोस्त सब मुझसे दूर भागने लगे। मेरी श्रीमती जी को ताने सुनने पड़ते थे, “अरे, ये डॉक् साहब को क्या हो गया , डॉक् साहब ने ये कौनसा नया शौक पाल लिया ! मेरी श्रीमती जी उनको दिलासा देती रही की चिंता न करो जल्दी ही पटरी पर आ जायेंगे “

खैर खूब गाने गाए, इतने गाए कि आवाज बैठ गई, कहीं शादी ब्याह में जाते तो मजाक का पात्र बनने लगे ‘क्या बात है आजकल तो गाने का शौक चढ़ा है।’ हमारी हसरत थी कि एक दिन स्टेज पर गाना गाएंगे, दिखा देंगे दुनिया को , लेकिन एक दिन गलती से हमारे गाने हमने खुद सुने, तो अहसास हुआ कि इन्हें सिर्फ और सिर्फ मैं ही सुनूं तो बेहतर है, इसलिए अपनी इच्छाओं का दमन कर के अपनी प्रतिभा को अपने बाथरूम तक सीमित रखने के वास्ते एक दिन स्टार मेकर से भावभीनी अश्रुपूरित विदा ली। फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा, डर लग रहा था की कहीं स्टार मेकर मेरा हाथ पकड़ कर रोक नहीं ले,में अपने आप को रोक नहीं पायूँगा

लेकिन शौक ने मुझे कभी हारने नहीं दिया। चाहे वह गिटार हो, पेंटिंग हो या फिर फोटोग्राफी, हर एक में मैंने कुछ न कुछ नया सीखा। कुछ कडवे कुछ मीठे अनुभव .लेकिन शयद येही तो जिंदगी है न |

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